कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है। इस पर्व में सूर्यदेव और षष्ठी देवी की पूजा की जाती है। इस बार ये पर्व 2 नवंबर, शनिवार को है।

उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्‌ट के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से सूर्य से संबंधित दोष कम होते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ये उपाय इस प्रकार हैं-

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1. सूर्य के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए छठ पर्व पर सूर्य यंत्र की स्थापना कर रोज उसकी पूजा करनी चाहिए। इससे दोष कम होते हैं और विशेष लाभ भी मिलता है। सूर्य यंत्र की स्थापना इस प्रकार करें-
छठ पर्व की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सूर्यदेव को प्रणाम करें। इसके बाद सूर्य यंत्र को गंगाजल व गाय के दूध से पवित्र करें। अब इस यंत्र की पूजा करने के बाद रुद्राक्ष की माला से सूर्य मंत्र का जाप करना चाहिए।
मंत्र- ऊं घृणि सूर्याय नम:
जाप करने के बाद इस यंत्र को अपने पूजा स्थान पर करें। इस यंत्र की पूजा से शीघ्र ही सूर्य संबंधी होने वाली समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।

2. छठ पर्व की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कामों से निपट कर सूर्य को अर्घ्य दें। अब पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जाप करें।
मंत्र - ऊं आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्
कम से कम 5 माला जाप अवश्य करें। इस प्रकार मंत्र जाप करने से जीवन की हर परेशानी दूर हो जाएगी। यदि इस मंत्र का जप प्रत्येक रविवार को किया जाए तो और भी जल्दी लाभ होता है।

3. छठ के दिन गुड़ एवं कच्चे चावल बहते हुए जल में प्रवाहित करना शुभ रहता है। अगर सूर्यदेव को प्रसन्न करना हो तो पके हुए चावल में गुड़ और दूध मिलाकर खाना चाहिए। ये उपाय करने से भी सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं।

4. ज्योतिष के अनुसार, तांबा सूर्य की धातु है। छठ पर्व पर तांबे का सिक्का या तांबे का चौकोर टुकड़ा बहते जल में प्रवाहित करने से कुंडली में स्थित सूर्य दोष कम होता है। इसके साथ-साथ लाल कपड़े में गेहूं व गुड़ बांधकर दान देने से भी व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो सकती है।

5. छठ पर्व की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद पूर्व दिशा में मुख करके कुश के आसन पर बैठें। अपने सामने बाजोट (पटिए) पर सफेद वस्त्र बिछाएं और उसके ऊपर सूर्यदेव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद सूर्यदेव की पंचोपचार पूजा करें और गुड़ का भोग लगाएं। पूजा में लाल फूल का उपयोग अवश्य करें। इसके बाद लाल चंदन की माला से नीचे लिखे मंत्र का जाप करें
मंत्र- ऊं भास्कराय नम:
कम से कम 5 माला जाप अवश्य करें