धर्म ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मोरयाई छठ (Moryai Chhath 2021) का व्रत रखा जाता है। इसे मोर छठ या कुछ स्थानों पर सूर्य षष्ठी व्रत भी कहते हैं। इस बार यह व्रत 12 सितंबर, रविवार को है।

उज्जैन. मोरयाई छठ पर मुख्य रूप से भगवान सूर्यदेव की पूजा की जाती है। इस बार मोरयाई छठ रविवार को होने से सूर्य पूजा का विशेष योग बन रहा है क्योंकि ये तिथि और वार दोनों के ही स्वामी सूर्यदेव हैं। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान, सूर्योपासना, जप एवं व्रत किया जाता है। इस दिन व्रत को अलोना (नमक रहित) भोजन दिन में एक बार ही करना चाहिए। आगे जानि कैसे दें सूर्य को अर्घ्य…

ये है पूजा विधि
- मोरयाई (Morai Chhath 2021) छठ की सुबह सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान करें। संभव नहीं हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर नहाएं।
- इसके बाद भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और चावल, फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- जल चढ़ाते समय सूर्य के वरूण रूप को प्रणाम करते हुए ऊं रवये नम: मंत्र का जाप करें। इस जाप के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना करना चाहिए।
- इस प्रकार जल चढ़ाने के बाद धूप, दीप से सूर्यदेव का पूजन करें। सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल कपड़े, गेहूं, गुड़, लाल चंदन का दान करें।
- श्रद्धानुसार इन में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा के बाद एक समय फलाहार करें।

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जिन लोगों की कुंडली में सूर्य अशुभ फल दे रहा हो, वे ये उपाय करें…
1.
सुबह सूर्योदय के समय लाल फूल, कुंकुम आदि से सूर्यदेव की पूजा करें। लाल वस्त्र भी अर्पित करें।
2. किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेकर माणिक रत्न तांबे की अंगूठी में अपनी अनामिका अंगुली में धारण करें।
3. जरूरतमंदों को अपनी इच्छा से गेहूं का दान करें। इससे भी सूर्य के दोष कम होते हैं।
4. लाल चंदन की माला से ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। कम से कम 5 माला का जाप करें।