कानपुर की 10 विधानसभा सीटों पर एसपी, बीएसपी और बीजेपी ने प्रत्याशी उतार दिए हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी को कानपुर की चार सीटों पर प्रत्याशियों के नाम फाइनल नहीं कर पा रही है। चार विधानसभा सीटों पर दावेदारों की संख्या इतनी ज्यादा है कि कांग्रेस हाईकमान नाम फाइनल नहीं कर पा रहा है। 

सुमित शर्मा
कानपुर: यूपी विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया चल रही है। कानपुर की 10 विधानसभा सीटों पर एसपी, बीएसपी और बीजेपी ने प्रत्याशी उतार दिए हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी को कानपुर की चार सीटों पर प्रत्याशियों के नाम फाइनल नहीं कर पा रही है। चार विधानसभा सीटों पर दावेदारों की संख्या इतनी ज्यादा है कि कांग्रेस हाईकमान नाम फाइनल नहीं कर पा रहा है। बिकरू कांड में आरोपी खुशी दुबे की मां गायत्री तिवारी की एंट्री होने से पार्टी की अंदर फूट पड़ती नजर आ रही है।

कानपुर में तीसरे चरण में चुनाव होने हैं। सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी अपना नामांकन भी करा चुके हैं। कानपुर की गोविंद नगर, कल्यानपुर, सीसामऊ और घाटमपुर सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। घाटमपुर विधानसभा सीट सुरक्षित सीट है। कांग्रेस को गोविंद नगर, कल्यानपुर और सीसामऊ विधानसभा में ब्राह्मण प्रत्याशियों के नाम फाइनल करने हैं। इन तीन सीटों पर आलाकमान हफ्तों से माथापच्ची कर रहा है, लेकिन प्रत्याशियों के नाम फाइनल नहीं हो पा रहे हैं। गोविंद नगर सीट से युवा छात्र नेता विकास अवस्थी का नाम सबसे उपर चल रहा है।

पार्टी के अंदर फूट
बिकरू कांड में आरोपी खुशी दुबे की मां गायत्री तिवारी को कांग्रेस पार्टी कल्यानपुर से टिकट देने की तैयारी कर रही है। गायत्री तिवारी की एंट्री होने से नाराज पार्टी के कार्यकर्ता और 17 वार्डों के अध्यक्षों ने अजय कुमार लल्लू से मुलाकात कर इस्तीफे की पेशकस की थी। नाराज पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि गायत्री तिवारी को टिकट मिलती है, तो हम सभी पार्टी से इस्तीफा दे देंगे।

इनको बनया प्रत्याशी
कांग्रेस पार्टी ने बिठूर से अशोक निषाद को प्रत्याशी बनया है। किदवई नगर से अजय कपूर को, आर्यनगर से प्रमोद जायसवाल, कैंट से सोहैल अंसारी, बिल्हौर से ऊषा रानी कोरी को टिकट दी है, महाराजपुर से कनिष्क पांडेय को उतारा है। कांग्रेस गोविंद नगर, सीसामऊ, कल्यानपुर और घाटमपुर के लिए मंथन कर रही है।

दावेदार निराश
कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे नेताओं का कहना है कि टिकट फाइनल नहीं होने निराशा महसूस हो रही है। कानपुर में 20 फरवरी को वोटिंग होनी है। यदि देरी से टिकट फाइनल होती है, तो हमें तैयारी करने का मौका भी नहीं मिल पाएगा। प्रत्याशियों के नामों में देरी से कार्यकर्ताओं का भी मनोबल टूट रहा है। 

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