मां का कहना है कि पुलिस ने गाड़ी का इंतजाम करने में हाथ खड़े कर दिए। वह अपनी ही बैलगाड़ी में शव लेकर आए हैं। हालांकि उन्होंने एंबुलेंस को कोई कॉल नहीं की। पुलिस चौकी इंचार्ज का कहना है कि युवती की घर पर ही मौत हुई थी। परिजनों की सहमति से ही शव बैलगाड़ी से पोस्टमार्टम हाउस तक लाया गया है। 

बागपत (Uttar Pradesh) । लॉकडाउन में लाचारी के हालात भी पैदा हो रहे हैं। पथरी का दर्द उठने से बीमार युवती की मौत हो गई। सूचना पर पुलिस घर पहुंची और पोस्टमार्टम कराने की बात कही। लेकिन, गाड़ी पुलिस ने नहीं दी। ऐसी स्थिति में परिवार के लोग शव को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने के लिए गाड़ी का इंतजाम नहीं हुआ। ऐसे में मजबूर परिवार को बैलगाड़ी पर शव रखकर ले जाना पड़ा। यह घटना गौरीपुर गांव की नई बस्ती की है।

यह है पूरा मामला
गौरीपुर गांव की नई बस्ती निवासी सितारा (18) पुत्री अय्यूब बीमार थी। परिजनों के मुताबिक पथरी का दर्द उठा। हालत इतनी खराब हुई कि कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई। वहीं, घटना की जानकारी होने पर निवाड़ा चौकी से पुलिस पहुंच गई। शव का पोस्टमार्टम कराने पर सहमति बनीं, लेकिन गाड़ी का इंतजाम नहीं हुआ।

भाई ने सुनाई ये कहानी
भाई इमरान, शाहनवाज और शादाब का कहना है कि निजी गाड़ी वाले लॉक डाउन के कारण नहीं मिले, जिस कारण वह बैलगाड़ी से ही शव लेकर आए हैं। वहीं, निवाड़ा पुलिस चौकी इंचार्ज जनार्दन का कहना है कि युवती की घर पर ही मौत हुई थी। परिजनों की सहमति से ही शव बैलगाड़ी से पोस्टमार्टम हाउस तक लाया गया है।

मां ने कही ये बातें
लॉकडाउन के चलते कोई गाड़ी वाला ले जाने को तैयार नहीं था। ऐसे में परिजन खुद ही बैलगाड़ी से शव को तीन किमी दूर पोस्टमार्टम हाउस लेकर गए। मां मुन्नी का कहना है कि पुलिस ने गाड़ी का इंतजाम करने में हाथ खड़े कर दिए। वह अपनी ही बैलगाड़ी में शव लेकर आए हैं। हालांकि उन्होंने एंबुलेंस को कोई कॉल नहीं की। 

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