कानपुर हिंसा मामले में पीएफआई कनेक्शन सामने आया है। पुलिस ने मामले में सीडीआर और व्हाट्सऐप चैट की छानबीन कर कई खुलासे किए हैं। मामले को लेकर आगे भी पड़ताल की जा रही है। 

कानपुर: नई सड़क पर हुए बवाल की साजिश में पीएफआई का हाथ होने की साजिश का खुलासा मंगलवार को हो गया। इस खुलासे के साथ ही एक और चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया। बीते दिनों हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने जिन तीन पीएफआई सदस्यों को गिरफ्तार किया है वह पहले भी जेल जा चुके हैं। गिरफ्तार किए गए लोग इससे पहले सीएए हिंसा के दौरान जेल गए थे। दरअसल कानपुर हिंसा को लेकर जब तहकीकात शुरू हुई तो मोबाइल नंबरों की सीडीआर व व्हाट्सएप चैट की भी जांच हुई। इसी जांच के बाद इन तीनों के बवाल में शामिल होने की पुष्टि हुई। पुष्टि होने के साथ ही पुलिस तत्काल हरकत में आई और उन्हीं साक्ष्यों के आधार पर इन तीनों को गिरफ्तार किया गया है।

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बंदी और बवाल को लगातार हो रही थी बातचीत
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मामले में बजरिया निवासी मोहम्मद उमर, फीलखाना निवासी सैफुल्ला, कर्नलगंज के मोहम्मद नसीम अहमद की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीना की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया कि यह तीनों लोग हयात जफर हाशमी के संपर्क में थे। इन तीनों लोगों ने बाजार बंदी व बवाल को लेकर आपस में लगातार बातचीत की इसको लेकर साक्ष्य जुटाए गए और तीनों को गिरफ्तार किया गया। 

कई अन्य लोगों की भी तलाश जारी
पुलिस के अनुसार जेल भेजे गए तीनों पीएफआई सदस्यों के अलावा कुछ और लोग भी इस मामले में शामिल हैं। उन लोगों की भी तलाश की जा रही है। ऐसे दो और सदस्य हैं। हालांकि इन दो सदस्यों में से एक बीमार है और एक लापता है। जिन अन्य दो लोगों का नाम भी सामने आ रहा है वह भी सीएए हिंसा के मामले में जेल गए थे। उसके बाद फरार होने वालों की तलाश की जा रही है। बताया गया कि कई और पीएफआई सदस्य शहर में हैं। इनके संपर्क भी हयात और उसके साथियों से थे। इनको लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही सबूतों के आधार पर उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। 

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