पिटबुल के हमले में कैसरबाग निवासी महिला की मौत के बाद उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। इस बीच मृतका के बेटे अमित ने बताया कि डॉग कई बार दरवाजे की घंटी बजने से गुस्सा होता था। 

लखनऊ: पिटबुल के हमले के बाद 80 वर्षीय महिला सुशीला की मौत मामले में बेटे ने कई राज से पर्दा उठाया। मृतका के पुत्र अमित ने बताया कि उनका पालतू कुत्ता पिटबुल आक्रामक नहीं था। वह तीन सालों से घर में रह रहा था और अक्सर ही मां के साथ खेलता रहता था। हालांकि कभी-कभी उनका पालतू पिटबुल ब्राउनी दरवाजे की घंटी बजने से चिढ़ता था और इसी वजह से अक्सर उसे गुस्सा भी आ जाया करता था। अमित ने आशंका जताई है कि शायद हमले के पीछे यही वजह रही होगी। 

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'लोगों का गुस्सा जायज, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था ब्राउनी'

मृतका के पुत्र द्वारा बताया गया कि उन्होंने कुत्ते ब्राउनी का लाइसेंस और वैक्सीनेशन सब कुछ करवा रखा था। उसका पूरा ख्याल रखा जाता था। किसी भी चीज की कमी नहीं रखी जाती थी। अमित ने बताया कि तीन साल से उनके पास दोनों कुत्ते पिटबुल और लेब्राडोर हैं। दोनों मां के साथ ही खेलते और रहते थे। घटना के बाद भले ही लोग पिटबुल को बैन करने की मांग कर रहे हैं और गुस्सा जाहिर कर रहे हैं लेकिन वह हमेशा से ऐसा नहीं था। फिलहाल इस घटना के सामने आने के बाद पिटबुल के लाइसेंस को निरस्त कर दिया गया है। 

पिटबुल को लेकर गई नगर निगम की गाड़ी
आपको बता दें कि कैसरबाग के बंगाली टोली से बीते दिनों यह घटना सामने आई थी। यहां 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला सुशीला को उसके ही पालतू डॉग पिटबुल ने नोच-नोचकर मार डाला था। घटना के बाद से सभी अचंभित हैं। मृतका सुशीला के बेटे अमित ने बताया कि वह अपने काम पर गए हुए थे। जब घटना के बारे में जानकारी लगी तो वह फौरन ही वापस आए और देखा कि मां को गंभीर चोट आई थी। बाहर भी काफी संख्या में लोग एकत्रित थे। अस्पताल पहुंचने पर मां को मृत घोषित कर दिया गया। इस पूरी घटना के अगले ही दिन नगर निगम की गाड़ी आई और पिटबुल को अपने साथ में ले गई। आपको बता दें कि नगर निगम अब पिटबुल के व्यवहार का कई दिनों तक अध्ययन करेगा जिसके जरिए पता लगाने का प्रयास होगा कि उसने यह हमला क्यों किया। 

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