उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में मिली करारी हार के बाद मायावती बहुजन समाज पार्टी में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में हैं। राज्य में एक वक्त सत्ता की सबसे बड़ी खिलाड़ी रही बहुजन समाज पार्टी अपने खिसकते जनाधार को लेकर परेशान है। इसी को लेकर पार्टी अब नए सिरे से अपने काडर तैयार करने में जुट गई है। 

दिव्या गौरव
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में मिली करारी हार के बाद मायावती बहुजन समाज पार्टी में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में हैं। राज्य में एक वक्त सत्ता की सबसे बड़ी खिलाड़ी रही बहुजन समाज पार्टी अपने खिसकते जनाधार को लेकर परेशान है। इसी को लेकर पार्टी अब नए सिरे से अपने काडर तैयार करने में जुट गई है। 

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पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मायावती उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख पदों पर नए सिरे से लोगों को बैठाएगी। उन्होंने बताया कि कभी दलित वोटबैंक पर एकछत्र राज करने वाली बसपा अपनी खोई ताकत वापस पाने के लिए बड़ी जुगत में लगी है। इसके लिए मायावती कुछ विश्वसनीय नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बात करके यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि पार्टी आखिर क्यों अपना वोटबैंक खो रही है। सूत्रों ने यह भी बताया कि फीडबैक के आधार पर पार्टी कुछ पुराने नेताओं को भी साथ ला सकती हैं। माया की योजना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले संगठन को फिर से खड़ा कर दिया जाए।

यूं गिरता चला गया बसपा का वोटबैंक
साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में एक भी सीट न जीतने पर भी बसपा का वोट प्रतिशत 20 फीसदी तक रहा। सूबे में बसपा का अपना काडर का वोट बैंक भी लगभग 22 फीसदी के आसपास ही माना जाता है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा मात्र एक सीट जीत पाई। हैरान करने वाली बात यह रही कि बसपा के जिन नेताओं के कंधों पर सारी जिम्मेदारी थी, वे भी इस चुनाव में कोई खास करिश्मा नहीं दिखा पाए और बसपा का मत प्रतिशत 12.88 पर पहुंच गया।