उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी में स्थानीय जिला अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद की प्रबंध समिति के सदस्यों पर इस परिसर में स्थित काशी विश्वेश्वर मंदिर का मूल ढांचा एवं धार्मिक स्वरूप बदलने का आरोप लगाते हुए इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली अर्जी को खारिज कर दिया।

वाराणसी: काशी (kashi) के ज्ञानवापी मामले (Gyanvapi Case) से जुड़े फैसले की तारीख धीरे धीरे नजदीक आती जा रही है। इसी बीच बीते 14 जून को ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) परिसर का प्रबंधन संभाल रही अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए जिला अदालत (District Court) में एक याचिका दायर की गई थी। जिसे 27 जून को खारिज कर दिया गया है। 

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तथ्यों के आधार पर अर्जी को अधूरा बताते हुए खारिज की गई याचिका
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी में स्थानीय जिला अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद की प्रबंध समिति के सदस्यों पर इस परिसर में स्थित काशी विश्वेश्वर मंदिर का मूल ढांचा एवं धार्मिक स्वरूप बदलने का आरोप लगाते हुए इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली अर्जी को खारिज कर दिया। वाराणसी के जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने गत जितेन्द्र सिंह द्वारा 27 जून को दायर अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने इस अर्जी को तथ्यों के आधार पर अपूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया। इसके साथ ही पहले भी एक और निचली अदालत की ओर से इस अर्जी को खारिज करने के फैसले को सही बताया है।

कमेटी पर मंदिर के मूल भाग का धार्मिक स्वरूप बदलने का लगाया आरोप
गौरतलब है कि गत 14 जून को जिला अदालत में दायर इस अर्जी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का प्रबंधन संभाल रही अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गयी थी। अर्जी में दलील दी गयी है कि मस्जिद परिसर में स्थित काशी विश्वेश्वर मंदिर को मुगलों ने नष्ट कर दिया था। लेकिन मंदिर के मूल भाग को तहस नहस नहीं किया था, लेकिन कमेटी के सदस्यों ने इस मंदिर के मूल भाग का धार्मिक स्वरूप बदलने की कोशिश की है।

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