आकाश सक्सेना की शिकायत के बाद आजम खां को विधायकी से हाथ धोना पड़ गया। इससे पहले आकाश ने अब्दुल्ला आजम के फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट को लेकर भी शिकायत की थी। 

रामपुर: यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट का बड़ा फैसला बीते दिनों सामने आया। भड़काऊ भाषण देने के मामले में आजम खां की विधायकी पर संकट उत्पन्न हो गया। हालांकि इस केस के पीछे सबसे बड़ा योगदान किसी का रहा है तो वह है आकाश सक्सेना। पेशे से व्यवसायी और पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना के बेटे आकाश सक्सेना ने ही आजम खां के खिलाफ केस दर्ज करवाया था। इसी केस में फैसले के बाद आजम की सदस्यता समाप्त होने का संकट उत्पन्न हुआ। इससे पहले वह अब्दुल्ला आजम की फर्जी डिग्री केस में उनकी विधानसभा सदस्यता को भी समाप्त कराने के केस में बड़ी भूमिका निभा चुके हैं।

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चुनाव आयोग को भेजी गई सीट खाली होने की अधिसूचना
गौरतलब है कि आकाश सक्सेना की ओर से दर्ज कराए गए केस में आजम खां के खिलाफ तीन साल केस की सजा सुनाई गई। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के अनुसार यदि किसी जनप्रतिनिधि को किसी अपराध में दो साल की सजा मिलती है तो वह सजा की तारीख से ही सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाएगा। इसके बाद वह अगले छह साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएगा। ऐसे में तीन साल की सजा के ऐलान के बाद आजम खां विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य हो चुके हैं। कोर्ट से आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के बाद में यूपी विधानसभा आजम खां की सीट खाली होने की अधिसूचना भी जारी कर चुनाव आयोग को भेज चुका है।

आजम खां ने पीएम मोदी और सीएम योगी के खिलाफ की थी टिप्पणी 
आजम खां ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मिलक कोतवाली इलाके के खातानगरिया गांव में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी और सीएम योगी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसी के साथ उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों को लेकर भी विवादित बयानबाजी की थी। उनके इस बयान का वीडियो भी जमकर वायरल हुआ था। आकाश सक्सेना ने इसी मामले में भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाते हुए आजम के खिलाफ केस दर्ज करवाया था। रामपुर एमपी एमएलए कोर्ट से इसी मामले में फैसला सुनाया गया और आजम खां को दोषी करार देते हुए 3 साल की सजा सुनाई गई। 

जानिए कौन हैं आकाश सक्सेना

आकाश सक्सेना पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना के बड़े बेटे होने के साथ ही भाजपा के नेता भी हैं। वह दो पैन कार्ड, दो पासपोर्ट, दो जन्म प्रमाण पत्र समेत कई मामलों में वादी हैं। इसी के साथ आजम खां और उनके परिवार के खिलाफ कई मामले में वह चार्जफ्रेम को मजबूत करने में गवाही भी दे चुके हैं। जौहर विवि की जमीनें छिनवाने में भी आकाश का हाथ रहा है। आकाश छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहें और उसके बाद कारोबार से जुड़े। वह उद्योगपतियों के बड़े नेता बने। आईआईए में लंबे समय तक वह चेरमैन रहें। इसके बाद उन्हें भाजपा के पश्चिमी यूपी के लघु उद्योग प्रकोष्ठ का संयोजक बना दिया गया। आकाश सक्सेना सपा के दिग्गज नेता आजम खां और उनके परिवार के खिलाफ 43 मुकदमों में सीधे पक्षकार हैं। आकाश औऱ आजम के बीच यह लड़ाई जनवरी 2018 से अब्दुल्ला आजम के फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट से शुरू हुई थी जो कि आजम खां की विधायकी गंवाने तक पहुंच चुकी है। आजम खां के खिलाफ रामपुर चुनावी मैदान में उतरे आकाश सक्सेना हनी 55 हजार से अधिक वोटों से हारे थे। यूपी चुनाव 2022 में आजम खां को यहां 1,30,649 वोट मिले थे वहीं आकाश सक्सेना को 75,411 वोट मिले थे। भले ही चुनाव में आकाश को जीत न मिली हो लेकिन उन्होंने आजम खान की विधायकी रद्द करवाकर करारी शिकस्त देने का काम जरूर किया है।

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