40 साल पहले 14 फरवरी-1981 को सिकंदरा थाना क्षेत्र के बेहमई गांव में फूलन देवी, मुस्तकीम, रामऔतार व लल्लू गैंग में शामिल 35-36 डकैतों ने धावा बोला था। घरों में लूटपाट करने के बाद डकैतों ने 26 पुरुषों को गांव के बाहर ले जाकर गोलियों से भून दिया था, जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी। छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 

कानपुर देहात ( Uttar Pradesh) । बेहमई नरसंहार कांड में मूल केस डायरी न होने की वजह से फैसला टलता जा रहा है। एसपी को दो बार समय दिए जाने के बाद अब कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह व पुलिस महानिदेशक को जांच कराकर 18 मार्च से पहले मूल केस डायरी उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। बता दें कि सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने छह जनवरी को फैसले की तिथि तय की थी। तब से अब तक छह बार तारीख लग चुकी हैं।

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20 लोगों को उतारा गया था मौत के घाट
40 साल पहले 14 फरवरी-1981 को सिकंदरा थाना क्षेत्र के बेहमई गांव में फूलन देवी, मुस्तकीम, रामऔतार व लल्लू गैंग में शामिल 35-36 डकैतों ने धावा बोला था। घरों में लूटपाट करने के बाद डकैतों ने 26 पुरुषों को गांव के बाहर ले जाकर गोलियों से भून दिया था, जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी। छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 

2012 में तय हुआ था आरोप
मामले में वादी राजाराम ने मुकदमा दर्ज कराया था। 24 अगस्त-2012 को पांच अभियुक्तों भीखा, पोसे उर्फ पोसा, विश्वनाथ उर्फ पुतानी उर्फ कृष्ण स्वरूप, श्याम बाबू व राम सिंह के खिलाफ आरोप तय होने के बाद कोर्ट में ट्रायल शुरू हो सका था। 13 फरवरी 2019 को जेल में निरूद्ध बंदी राम सिंह की मौत हो गई, जबकि पोसा जेल में बंद हैं। वहीं, अन्य तीनों अभियुक्त जमानत पर हैं। 

(फाइल फोटो)