खेल-खेल में अचानक विधि झूले से गिर गई और उसके गले में रस्सी फंस गई। इससे उसकी हालत बिगड़ गई। भाई-बहन के चिल्लाने पर पास के कमरे में सो रहे उनके ताऊ विनोद के अलावा अन्य ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे और विधि के गले से रस्सी निकाली। 

बागपत: सावन का महीना चल रहा है। सावन में झूला झूलने की प्रथा पुराने समय से चलती तली आ रही जा रही है। ऐसे में कई हादसे भी देखने को मिलते हैं। झूला झूलने की चाहत में एक मासूम बच्ची की जान चली गई। बच्ची कक्षा एक की छात्रा थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल में जुटी है। घटना के वक्त बच्ची की मां नौकरी पर गई थी। श्रावण माह में पेड़ की टहनी या छत के कुंदे में रस्सी डालकर महिलाएं व बच्चे झूला झूलते हैं। ग्राम काठा में अनुसूचित जाति की महिला रचना ने भी अपने मकान के दरवाजे के कुंडे में रस्सी डालकर झूला बनाया है। लेकिन, उसे ये नहीं पता था कि यही झूला उसकी बेटी की मौत का कारण बना जाएगा। 

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मां घर में नहीं थी मौजूद 
बता दें कि रचना के पति मुकेश का चार साल पहले निधन हो गया था। रचना खेकड़ा स्थित एक फैक्ट्री में नौकरी करती है और उसके तीन बच्चे गांव के परिषदीय स्कूल में पढ़ते हैं। खेकड़ा स्थित फैक्ट्री में रचना गई हुई थी और स्कूल की छुट्टी के बाद उसकी दो बेटियां आठ वर्षीय छवि व छह वर्षीय विधि और चार वर्षीय बेटा अभि घर लौटे और झूला-झूलने लगे। 

झूले से गिर समय गले में फंसी रस्सी
खेल-खेल में अचानक विधि झूले से गिर गई और उसके गले में रस्सी फंस गई। इससे उसकी हालत बिगड़ गई। भाई-बहन के चिल्लाने पर पास के कमरे में सो रहे उनके ताऊ विनोद के अलावा अन्य ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे और विधि के गले से रस्सी निकाली और उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। इमरजेंसी मेडिकल आफिसर डा. जेके यादव ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। छात्रा विधि कक्षा एक की छात्रा थी। वहीं, कोतवाली प्रभारी रवि रतन सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच की। कोतवाली प्रभारी रवि रतन सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

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