मां के प्यार से ज्यादा यशू ने पैसे को अहमियत दी और हत्या की वारदात को अंजाम दिया। यशू ने पुलिस को बताया है कि रोजाना की क्लेश से तंग आकर उसने तीन महीने पहले मां की हत्या की प्लानिंग की थी। क्राइम सीरियल देखकर उसे इस तरह हत्या का आइडिया आया था।

हाथरस: एक तरफ टीवी पर आ रहे कार्यक्रम लोगों के लिए सीख की प्रेरणा बनते हैं। वहीं कई बार कुछ लोग इनसे सीख लेकर उसका उपयोग गलत कामों मे करते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां क्राइम सीरियल देखकर बेटे ने अपनी मां की हत्या की साजिश रच डाली। 

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पैसों के खातिर उतारा मौत के घाट
21 वर्ष की उम्र में पैसे के खातिर मां को मौत के घाट उतारने के यशू के कृत्य को देखकर हर कोई अचंभित रह गया है। जन्म से लेकर अब तक दिन रात ख्याल रखने वाली मां के लिए बेटा ही काल बन जाएगा, यह बात कभी रीता अग्रवाल ने नहीं सोची होगी। 

क्राइम सीरियल देखकर बनाया हत्या का प्लान 
छह वर्ष पहले पति की मौत के बाद रीता अग्रवाल ही यशू का लालन-पालन कर रही थी, लेकिन मां के प्यार से ज्यादा यशू ने पैसे को अहमियत दी और हत्या की वारदात को अंजाम दिया। यशू ने पुलिस को बताया है कि रोजाना की क्लेश से तंग आकर उसने तीन महीने पहले मां की हत्या की प्लानिंग की थी। क्राइम सीरियल देखकर उसे इस तरह हत्या का आइडिया आया था।

यशू ने 12वीं तक ही पढ़ाई की है। वर्ष 2006 में पिता संजय अग्रवाल की मौत के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और खुद व्यापार शुरू कर दिया। मामा और नाना ने उसे घर के नीचे की दुकान में कन्फेक्शनरी के सामान का थोक का काम खुलवाया था। लगा था कि बेटा पैरों पर खड़ा होगा और मां और बहन के लिए सहारा बनेगा। 

वर्ष 2020 में बहन की शादी हाथरस के नवीपुर मोहल्ले के युवक से हुई। अब मां और बेटे घर पर रहने लगे। मां उसका पूरा ख्याल रखती थी। यशू को इसी बीच शेयर ट्रेडिंग का शौक लग गया। शुरुआत में पैसे जीतने के बाद वह ज्यादा पैसे लगाने लगा। चर्चा आईपीएल के सट्टा खेलने की भी है, लेकिन यशू ने इस बात से इंकार किया है। 

शेयर ट्रेडिंग में गवाए 27 लाख रुपये
शेयर ट्रेडिंग में वह एक दो नहीं बल्कि 27 लाख रुपये गंवा बैठा। इसके बाद वह तनाव में रहने लगा। चूंकि पैसों का भुगतान उसने मां के संयुक्त खाते से किया था, तो मां भी इस घाटे को लेकर बार-बार उसे डांटती थी। यशू ने पुलिस को बताया है कि उसने एक दिन क्राइम सीरियल में देखकर मां की हत्या की प्‍लानिंग बनाई।

23 मई की रात को वह सवा नौ बजे बाइक से घर पहुंचा और बाइक को भीतर खड़ा किया। देर रात मां रीता अग्रवाल सो गईं। वह मोबाइल चलाता रहा। उसने पुलिस को बताया कि सुबह करीब पौने पांच बजे मां गहरी नींद में सो रही थी। 

बेटे ने ऐसे दिया वारदात को अंजाम
मां के पैर दीवार की तरफ थे जबकि सिर कमरे के खाली हिस्से की तरफ था। सीरियल की तरह है बेड से नींचे खड़े होकर यशू ने उसके मुंह पर तकिया रखकर दबा दिया। वह तब तक तकिये को दबाये रहा जब तक रीता अग्रवाल की सांसें नहीं थम गईं। इसके बाद उसने खुद फांसी के फंदे पर झूलने की कोशिश की, लेकिन फंदा नीचा होने के कारण वह आत्महत्या में सफल नहीं हो सका।

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