खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या को लेकर भारत पर आरोप लगाने के बाद से कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो परेशानी में हैं। वह विश्वमंच पर अलग-थलग पड़ गए हैं। 

ओटावा। 18 जून 2023 को कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या हुई थी। बीते सोमवार को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस हत्याकांड में भारत सरकार के एजेंटों की संलिप्तता के आरोप लगाकर वह बवाल खड़ा किया, जिसने दोनों देशों के संबंधों को अब तक के सबसे निचले स्थान पर पहुंचा दिया है।

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भारत के साथ संबंध खराब करने के चलते जस्टिन ट्रूडो की परेशानी बढ़ गई है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार ट्रूडो विश्वमंच पर अलग-थलग पड़ गए हैं। इस सप्ताह वह न्यूयॉर्क में थे तो यह अकेलापन साफ दिखा। पत्रकारों के सवाल सुनते वक्त कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की मुस्कान फीकी पड़ने लगी थी। लगभग सभी प्रश्न भारत और ट्रूडो द्वारा लगाए गए आरोप के बारे में थे। भारत ने उनके सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पत्रकारों को जवाब देते वक्त ट्रूडो ने धीरे-धीरे और सावधानी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "हम उकसाने या समस्या पैदा करने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।" कई पत्रकारों ने पूछा कि कनाडा के सहयोगी इस समय कहां हैं? एक पत्रकार ने ट्रूडो से कहा, "ऐसा लगता है कि आप अकेले हैं"।

ट्रूडो को सहयोगियों ने अपने हाल पर छोड़ा

कम से कम लोगों की नजरों में ट्रूडो को काफी हद तक अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। कोई सहयोगी देश खुलकर कनाडा के पक्ष में और भारत के खिलाफ नहीं आ रहा है। इसकी वजह है कि ट्रूडो ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक और कनाडा की तुलना में 35 गुना बड़ी आबादी वाले भारत के साथ टकराव का रास्ता अपना लिया है।

ट्रूडो ने जिस दिन निज्जर हत्याकांड को लेकर विस्फोटक आरोप लगाए उस दिन से फाइव आइज खुफिया गठबंधन में उनके सहयोगियों ने स्पष्ट रूप से भारत के खिलाफ बयान नहीं दिए। उन्होंने जो बयान दिए वे पूर्ण समर्थन से बहुत कम थे। ब्रिटेन के विदेश सचिव जेम्स क्लेवरली ने कहा कि उनका देश "कनाडा जो कह रहा है उसे बहुत गंभीरता से लेता है"। लगभग समान भाषा का प्रयोग करते हुए, ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि वह आरोपों से "गहराई से चिंतित" है।

जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र में की भारत की तारीफ

कनाडा के लिए सबसे अधिक चौंकाने वाली चुप्पी अमेरिका की रही। अमेरिका कनाडा का घनिष्ठ सहयोगी हैं, लेकिन उसने कनाडा की ओर से नाराजगी व्यक्त नहीं की। इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने भारत की बात की, लेकिन निंदा करने के लिए नहीं। उन्होंने नया आर्थिक मार्ग स्थापित करने में मदद करने के लिए भारत की प्रशंसा की।

बाइडेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने बाद में कहा कि कनाडा से बारीकी से परामर्श किया जा रहा है। अमेरिका को "गहरी चिंता" है। अमेरिका का यह रुख पश्चिमी दुनिया के लिए भारत का बढ़ता महत्व बताता है। विशेषज्ञों के अनुसार कनाडा के लिए समस्या यह है कि उसके हित वर्तमान में भारत के व्यापक रणनीतिक महत्व की तुलना में बहुत कम हैं।

भारत पर केंद्रित है पश्चिमी देशों की इंडो-पैसिफिक रणनीति

कनाडा के विल्सन सेंटर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता जेवियर डेलगाडो ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और इन सभी पश्चिमी और इंडो-पैसिफिक सहयोगियों ने चीन को खिलाफ सुरक्ष कवच के रूप में एक ऐसी रणनीति बनाई है जो मुख्य रूप से भारत पर केंद्रित है। यह कुछ ऐसा है जिसे वे खिड़की से बाहर फेंकने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं।"

कनाडा के आरोपों के बाद भी विश्व मंच पर अपेक्षाकृत शांति कनाडा की कमियों का भी संकेत हो सकती है। कनाडा एक भरोसेमंद पश्चिमी सहयोगी है, लेकिन वह अपने आप में एक वैश्विक शक्ति नहीं। कनाडा इंस्टीट्यूट के निदेशक क्रिस्टोफर सैंड्स ने कहा, “यह कमजोरी का क्षण है। फिलहाल हम हार्ड पावर मूवमेंट देख रहे हैं। यह वह माहौल नहीं है जहां कनाडा चमकता है। निर्णायक चीज ताकत और पैसा है, जो कनाडा के पास नहीं है।”