दक्षिण चीन सागर पर उड़ान भर रहे अमेरिकी B-52 बॉम्बर के 10 फीट रेंज में एक चीनी लड़ाकू विमान आ गया। अमेरिकी सेना ने घटना का वीडियो जारी किया है। 

वाशिंगटन। अमेरिकी सेना ने गुरुवार को जानकारी दी कि दक्षिण चीन सागर पर एक चीनी लड़ाकू विमान B-52 बॉम्बर के बेहद करीब पहुंच गया। दोनों विमानों के बीच मात्र 10 फीट की दूरी बची थी। घटना मंगलवार की है।

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यूएस इंडो -पैसिफिक कमांड ने कहा कि चीनी पायलट ने असुरक्षित और गैर-पेशेवर तरीके से उड़ान भरी। उसने बी -52 के नीचे, सामने और 10 फीट करीब आकर उड़ान भरी। इससे दोनों विमानों के टकराव का खतरा पैदा हो गया था।

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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने वाले हैं बाइडेन
चीनी वायुसेना ने यह हरकत तब की है जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन शुक्रवार को व्हाइट हाउस के दौरे पर आने वाले चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बात करने वाले हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक औपचारिक होगी या अनौपचारिक मुलाकात होगी। बाइडेन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने सैन फ्रांसिस्को में APEC शिखर सम्मेलन के मौके पर मिल सकते हैं।

अमेरिका और चीन ने एक-दूसरे पर लगाए हैं आरोप

अमेरिका और चीन दोनों ने गुरुवार को फुटेज जारी कर एक-दूसरे पर दक्षिण चीन सागर और उसके आसपास भड़काऊ युद्धाभ्यास करने का आरोप लगाया। इससे विवादित जलमार्ग पर तनाव बढ़ गया है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने वीडियो जारी किया, जिसमें कहा गया कि यूएसएस राल्फ जॉनसन ने 19 अगस्त को दक्षिण चीन सागर में नियमित ट्रेनिंग कर रहे एक चीनी नेवी टास्क फोर्स को परेशान किया।

दूसरी ओर इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा के प्रभारी पेंटागन के शीर्ष अधिकारी एली रैटनर ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अमेरिका ने पिछले दो वर्षों में अमेरिकी विमानों के खिलाफ चीनी पायलटों के जोखिम भरे व्यवहार के अधिक उदाहरण देखे हैं।

दक्षिण चीन सागर को अपना क्षेत्र बताता है चीन

गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन द्वारा विवाद किया जा रहा है। चीन इस पूरे इलाके को अपना क्षेत्र बताता है। वह दक्षिण चीन सागर से दूसरे देशों के समुद्री जहाजों के चलने और इस इलाके से आकाश से विमानों के उड़ान का विरोध करता है।

दूसरी ओर अमेरिका और विश्व के अधिकतर देशों का मानना है कि दक्षिण चीन सागर अंतरराष्ट्रीय जल है। यहां से कोई भी देश को अपने समुद्री जहाज या विमान को ले जा सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश दक्षिण चीन सागर से लगातार युद्धपोतों को ले जाते हैं। इसके आकाश से लड़ाकू और बॉम्बर विमानों द्वारा उड़ान भरे जाते हैं।