चीन के खाद्य बाजार, जहां सबसे पहले जानलेवा वायरस सामने आया, वहां भेड़िये के बच्चे से लेकर कस्तूरी बिलाव जैसी प्रजातियों तक, विभिन्न तरह के वन्यजीव मिलते थे 

शंघाई: चीन के खाद्य बाजार, जहां सबसे पहले जानलेवा वायरस सामने आया, वहां भेड़िये के बच्चे से लेकर कस्तूरी बिलाव जैसी प्रजातियों तक, विभिन्न तरह के वन्यजीव मिलते थे। इनमें कस्तूरी बिलाव जैसे कई ऐसे जीव हैं, जिसका संबंध पिछली महामारियों से रहा है।

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चीनी मीडिया के मुताबिक वुहान के हुआनान सीफूड बाजार की कड़ी निगरानी की जा रही है, जिसके बारे में चीनी अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि जिस वायरस से अभी तक नौ लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों प्रभावित हैं, अनुमान है कि वह इसी खाद्य बाजार में बेचे जए एक जंगली जानवर से फैला।

चीन में कस्तूरी बिलाव खाने से संबंधित

इससे पहले फैलीं जानलेवा महामारियों का कारण भी जंगली जानवर ही थे। गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (सार्स) चीन में कस्तूरी बिलाव खाने से संबंधित था। ताजा वायरस के प्रकोप से चीनी अधिकारियों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है कि उन्होंने वन्यजीव तस्करी की निगरानी में ढिलाई बरती।

इंटरनेट पर उपलब्ध इस खाद्य बाजार की एक मूल्य सूची के मुताबिक यहां जीवित लोमड़ी, मगरमच्छ, भेड़िया, सलामैंडर, सांप, चूहे, मोर, साही और ऊंट के मांस सहित 112 आइटम उपलब्ध हैं। वेंडर की मूल्य सूची में लिखा है, “ताजा कटा हुआ, जमा हुआ और आपके दरवाजे तक... जंगली जीव सभी के लिए।” हालांकि, एएफपी ने कहा है कि इस मूल्य सूची की सत्यता प्रमाणित नहीं है।

जानवरों के व्यापार पर है प्रतिबंध 

चीन के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के निदेशक गाओ फू ने बीजिंग में बुधवार को कहा कि अधिकारियों का मानना है कि संभव है कि ये वायरस “सीफूड मार्केट में जंगली जानवर” से आया है। चीन में कई जंगली जानवरों के व्यापार पर प्रतिबंध है और इसके लिए विशेष लाइसेंस लेना पड़ता है, लेकिन नियम ढीले हैं।

चीन में सार्स जैसे नए विषाणु की चपेट में आने से मरने वालों की संख्सा बढ़कर बुधवार को नौ हो गई जबकि संक्रमण के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है और अब तक देश में इसके करीब 440 मामले सामने आ चुके हैं। चीन के वुहान शहर में इससे जुड़े सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। एक करोड़ से अधिक की आबादी वाला वुहान एक प्रमुख परिवहन केंद्र है।

सार्स के बारे में भी पाया गया था कि यह चीन के वन्यजीव बाजार में उपलब्ध कस्तूरी बिलाव में पाया गया था। बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि चमगादड़ों ने बिल्ली जैसे जीवों को इससे संक्रमित किया और फिर इंसानों द्वारा इन बिल्लियों को खाने से यह इंसानों में फैला ।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

(फाइल फोटो)