New US Visa Rules: ट्रंप प्रशासन ने कंटेंट मॉडरेशन व फैक्ट-चेकिंग से जुड़े लोगों के वीजा खारिज करने का निर्देश दिया है। इससे H-1B वीजा पर निर्भर भारतीय टेक कर्मचारियों पर बुरा असर पड़ेगा।

वाशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को फैक्ट-चेकिंग, कंटेंट मॉडरेशन, कानून पालन और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े काम करने वालों के वीजा आवेदन खारिज करने का निर्देश दिया है। स्टेट डिपार्टमेंट के एक मेमो से साफ है कि इन नए वीजा नियमों का असर टेक सेक्टर के विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारत जैसे देशों के उम्मीदवारों पर पड़ेगा। H-1B वीजा पर भारतीय टेक कर्मचारी सबसे ज़्यादा निर्भर हैं। इस नए कानून के तहत, H-1B वीजा आवेदकों को उनकी पिछली नौकरी के आधार पर वीजा देने से मना किया जा सकता है। नया निर्देश कांसुलर अधिकारियों को "अमेरिकी प्रतिक्रियाओं को सेंसर करने या सेंसर करने की कोशिश करने के लिए जिम्मेदार या इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को वीजा देने से इनकार करने" का निर्देश देता है। यह निर्देश पत्रकारों और पर्यटकों सहित सभी तरह के वीजा पर लागू होता है।

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हालांकि, इसका मुख्य निशाना टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया सेक्टर के एक्सपर्ट्स को दिए जाने वाले H-1B वीजा हैं। आवेदकों के प्रोफेशनल रिकॉर्ड, लिंक्डइन प्रोफाइल और सोशल मीडिया अकाउंट्स की बारीकी से जांच की जाएगी कि क्या वे फैक्ट-चेकिंग, कंटेंट मॉडरेशन या कानून पालन जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। ऐसे कामों में शामिल होने के सबूत मिलने पर वीजा के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है। करीब 70 प्रतिशत H-1B वीजा होल्डर भारत से हैं। कंटेंट मॉडरेशन, फैक्ट-चेकिंग और ऑनलाइन सेफ्टी जैसी नौकरियां अमेरिकी टेक कंपनियों सहित कई कंपनियां बड़े पैमाने पर विदेशों से, खासकर भारत से, आउटसोर्स करती हैं। यह नई नीति हजारों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में नौकरी के मौकों पर बुरा असर डाल सकती है।

ट्रंप प्रशासन का रुख

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि यह फैसला अमेरिकी नागरिकों की बोलने की आजादी की रक्षा के लिए लिया गया है। स्टेट डिपार्टमेंट के एक प्रवक्ता ने कहा, "यह साफ करता है कि प्रशासन उन विदेशियों के खिलाफ नागरिकों की बोलने की आजादी की रक्षा करेगा जो अमेरिकियों को सेंसर करना चाहते हैं। हम उन विदेशियों का समर्थन नहीं करते जो अमेरिकियों को चुप कराने के लिए सेंसर के रूप में काम करने आते हैं।" वहीं, 'ट्रस्ट एंड सेफ्टी' से जुड़ी नौकरियों को 'सेंसरशिप' मानने पर गहरी चिंता जताई गई है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है, "'ट्रस्ट एंड सेफ्टी' एक बहुत बड़ा फील्ड है, जिसमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को रोकना, धोखाधड़ी और वित्तीय घोटालों को रोकना जैसे जीवन बचाने वाले महत्वपूर्ण काम शामिल हैं। इस क्षेत्र में काम करने वाले ग्लोबल कर्मचारी अमेरिकियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।" इस नीति की आलोचना भी हो रही है कि यह कंटेंट रेगुलेशन और राजनीतिक पक्षपात के बीच की रेखा को धुंधला कर देगी, और कानूनी और तकनीकी काम करने वाले कर्मचारियों को भी वीजा से वंचित किया जा सकता है।