पाकिस्तान भी श्रीलंका की राह पर है, जहां महंगाई ने लोगों को भड़का दिया है। श्रीलंका में इमरजेंसी लगाई गई है, जबकि पाकिस्तान में इमरान खान सरकार गिरने की स्थिति में है। शुक्रवार को जारी पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (Pakistan Bureau of Statistics-PBS) के आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें मार्च में 12.7 प्रतिशत बढ़ गई हैं, जबकि पिछले महीने की यह 12.2 प्रतिशत थीं।

इस्लामाबाद. महंगाई के चलते पाकिस्तान की हालत भी लगातार पतली होती जा रही है। पाकिस्तान भी श्रीलंका की राह पर है, जहां महंगाई ने लोगों को भड़का दिया है। श्रीलंका में इमरजेंसी लगाई गई है, जबकि पाकिस्तान में इमरान खान सरकार गिरने की स्थिति में है। शुक्रवार को जारी पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (Pakistan Bureau of Statistics-PBS) के आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें मार्च में 12.7 प्रतिशत बढ़ गई हैं, जबकि पिछले महीने की यह 12.2 प्रतिशत थीं। बता दें कि 69 वर्षीय इमरान खान पिछले साल देश की शक्तिशाली सेना से समर्थन खोने के बाद कुछ हफ्तों से राजनीतिक संकट की चपेट में है। इमरान खान की सरकार कभी भी गिर सकती है। आइए देखते हैं पाकिस्तान में महंगाई डायन कहां तक पहुंची है...

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पाकिस्तान में लगातार बढ़ रही महंगाई
पाकिस्तान में डायन बनी महंगाई(inflation) मार्च में मुद्रास्फीति की दर खाद्य और ऊर्जा वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण 12.7% बढ़ी। यह जून 2018 की तुलना में तीन गुना अधिक है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index -CPI) के अनुसार, मुद्रास्फीति 22 जनवरी के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर है। जनवरी में मुद्रास्फीति 13 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जबकि फरवरी 2020 में 12.4 प्रतिशत।

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तेल की कीमतों में कमी के बाद भी महंगाई नहीं रुकी
प्रधान मंत्री इमरान खान(Prime Minister Imran Khan) ने मार्च में तेल की कीमतों में कमी की थी। ये कीमतें 30 जून तक इस स्तर पर जारी रहेंगी। उपभोक्ताओं को राहत देने सभी पीओएल (Pakistan Oilfields Limited) प्रॉडक्ट्स पर बिक्री कर शून्य कर दिया गया है यह मार्च में करीब 45 अरब रुपये होता है।

बिजली के बिलों में भी कटौती
सरकार ने बिजली शुल्क में 5 रुपये की कमी कर दी है। इन सबसे देश में गैर-खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की संभावना है। हाल के महीनों में मुद्रास्फीति में साल-दर-साल (The year-on-year-YoY) वृद्धि मुख्य रूप से ईंधन, बिजली, घर का किराया, परिवहन और गैर-नाशयोग्य खाद्य पदार्थों(non-perishable) की बढ़ती कीमतों से प्रेरित है।

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रूस-यूक्रेन ने भी बढ़ाया संकट
वित्त मंत्रालय ने अपने मार्च अपडेट में कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था वित्तीय प्रतिबंधों, कमोडिटी की कीमतों और आपूर्ति-श्रृंखला में रोड़ा सहित चुनौतियों का सामना कर रही है। इन चुनौतियों ने वैश्विक मुद्रास्फीति को बढ़ावा दिया है। अधिकांश देशों में डेवलपमेंट पर खर्चा कम कर दिया गया है।

पाकिस्तान में इतनी बड़ी महंगाई
पीबीएस के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 9 महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति अभी भी उच्च स्तर पर है। शहरी क्षेत्रों में यह मार्च में सालाना आधार पर 14.5 प्रतिशत और महीने-दर-महीने 1.8 प्रतिशत हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कीमतों में वृद्धि क्रमश: 15.5 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत थी।

सबकुछ महंगा
पाकिस्तान में मांस, फलों और सब्जियों की कीमतें प्रमुख शहरी केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही हैं। गैर-खाद्य शहरी मुद्रास्फीति में सालाना आधार पर 10.4 प्रतिशत और मासिक मुद्रास्फीति में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह क्रमश: 12.5 प्रतिशत और 0.2 प्रतिशत बढ़ी। गैर-खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि मुख्य रूप से मार्च में तेल की बढ़ती कीमतों के कारण हुई।

पिछले महीने की तुलना में मार्च में जिन खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हुई, उनमें चिकन 33.63 प्रतिशत, फल 15.17 प्रतिशत, सरसों का तेल 8.73 प्रतिशत, वनस्पति घी 8.32 प्रतिशत, प्याज 7.01 प्रतिशत, कुकिंग ऑयल 5.05 प्रतिशत, चने 2.11 प्रतिशत शामिल हैं। चाय 1.92 प्रतिशत, दूध 1.52पीसी और बेसन 0.91प्रतिशत है।

यह भी जानें
हालांकि पाकिस्तान के शहरी इलाकों में टमाटर की कीमतों में क्रमश: 36.53 फीसदी, अंडे 14.75 फीसदी, गेहूं 4.89 फीसदी, आलू 3.68 फीसदी, मसाला एवं मसाले 2.38 फीसदी, गुड़ 1.10 फीसदी, गेहूं का आटा 1.08 फीसदी और चीनी 1.02 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।