यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिम देशों ने लगातार प्रतिबंध थोपे हैं। हालांकि, रूस उर्जा और तेल का दुनिया में दूसरे नंबर का निर्यातक है। दुनिया के तमाम देश इस पर निर्भर हैं। ऐसे में कई पश्चिमी देशों का उर्जा आयात प्रतिबंध लगाना बेहद मुश्किल भरा फैसला हो सकता है। 

ब्रसेल्स। यूरोपीय संघ (European Union) के राष्ट्र रूसी ऊर्जा आयात (Energy imports ban) पर प्रतिबंध लगाने को लेकर बंटते दिख रहे हैं। एक और तमाम राष्ट्र रूस से उर्जा आयात के प्रतिबंध के पक्ष में हैं तो जर्मनी जैसे कई देश इसपर गहन मंथन कर ही फैसला लेने का सुझाव दे रहे हैं। सोमवार को मीटिंग में यूरोपीय संघ (EU) के अधिकतर देश विभाजित रहे। हालांकि, एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि मास्को द्वारा यूक्रेनी शहर मारियुपोल में किए जा रहे एक बड़े पैमाने पर युद्ध अपराध की निंदा की गई है। 
उधर, ब्रसेल्स में विदेश और रक्षा मंत्रियों की बैठक में यूक्रेन को हथियारों के लिए वित्तीय पैकेज को दोगुना करके 1 बिलियन यूरो करने के लिए हरी झंडी दे दी गई है।

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यूरोपीय संघ और पश्चिम चाहता है रूस पस्त हो

यूरोपीय संघ और पश्चिमी सहयोगियों ने प्रतिबंधों से रूस को पस्त करना चाहता है। इन देशों की इच्छा है कि रूसी अर्थव्यवस्था को पस्त कर दिया जाए क्योंकि वे पड़ोसी पर हमला करने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दंडित करना चाहते हैं।

बाल्टिक देश तेल निर्यात प्रभावित करने के पक्षधर

बाल्टिक देशों और आयरलैंड सहित कुछ सदस्य देशों ने प्रतिबंधों के एक नए दौर में रूस के प्रमुख तेल निर्यात को प्रभावित करने के लिए जोर दिया है। लेकिन आर्थिक महाशक्ति जर्मनी और अन्य देश, अभी भी प्रमुख क्षेत्रों को लक्षित करने के लिए अनिच्छुक दिख रहे हैं। क्योंकि ये सभी देश अभी भी रूसी आयात पर ही निर्भर हैं। हालांकि, यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल ने कहा, "आज का दिन क्षेत्र में निर्णय लेने का दिन नहीं था, इसलिए कोई निर्णय नहीं लिया गया। हमें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि हम एक प्रभावी प्रतिक्रिया के साथ आएं जिससे सदस्य राज्यों को कोई आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।"

आयरिश विदेश मंत्री साइमन कोवेनी ने कहा कि ऊर्जा एक स्पष्ट क्षेत्र है जहां अगर हम चाहते हैं कि इन प्रतिबंधों को लागू कर रूस को आर्थिक दंड दिया जाए। लेकिन लेकिन यह इतना सीधा नहीं है, दुर्भाग्य से और ऐसा इसलिए है क्योंकि यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों की रूसी तेल और गैस पर बहुत महत्वपूर्ण निर्भरता है।

मारियुपोल को लेकर की जा रही है निंदा

प्रतिबंधों के एक नए दौर पर बहस तब की जा रही है जब रूस यूक्रेनी शहरों पर विनाशकारी हमले के साथ दबाव बना रहा है। वह विशेष रूप से मारियुपोल के बंदरगाह पर हमले कर सख्त दबाव बनाने लगा है। बोरेल ने कहा कि मारियुपोल में जो हो रहा है वह एक बड़ा युद्ध अपराध है, रूस सब कुछ नष्ट कर रहा है, बमबारी कर रहा है और सभी को मार रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रूस ने जितना संभव हो उतने यूक्रेनियन को देश से भागने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि 30 लाख से अधिक यूरोपीय संघ की ओर सीमा पर भाग चुके हैं।

नागरिकों को डराने के लिए हमले

बोरेल ने कहा, "मुझे विश्वास है कि पुतिन शरणार्थियों को एक उपकरण के रूप में, एक हाथ के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जितना वे कर सकते हैं भेज रहे हैं। उन्होंने परिवहन के बुनियादी ढांचे को नष्ट नहीं किया है, उन्होंने नागरिकों को डराने और उन्हें भागने के लिए शहरों को नष्ट कर दिया है।"

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