क्या इजरायल अमेरिकी अधिकारियों की बातचीत सुनकर ईरान नीति का बड़ा राज जानना चाहता था? पेंटागन ने इजरायली काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे को अचानक "क्रिटिकल" स्तर तक क्यों बढ़ाया? क्या अमेरिकी रक्षा कर्मियों के फोन में सीक्रेट निगरानी सॉफ्टवेयर चुपके से इंस्टॉल किया गया था? ट्रंप-नेतन्याहू मतभेद और जासूसी आरोप-क्या पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है?
वाशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और खुफिया दुनिया से एक ऐसी सनसनीखेज खबर आ रही है, जिसने दुनिया के दो सबसे पक्के दोस्तों-अमेरिका और इजरायल-के रिश्तों की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (پینٹاگون - Pentagon) ने इजरायल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस (प्रति-खुफिया) खतरे के आकलन को सबसे ऊंचे यानी 'क्रिटिकल' (गंभीर) स्तर पर पहुंचा दिया है। पेंटागन की कई खुफिया रिपोर्टों में यह डरावना खुलासा हुआ है कि इजरायल कोई और नहीं, बल्कि खुद शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों की बेकाबू जासूसी कर रहा है।

निशाने पर ट्रंप के सबसे करीबी: कौन हैं वो 3 बड़े अमेरिकी चेहरे?
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (NYT) और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसियां अमेरिकी प्रशासन के उन शीर्ष चेतानों की बातें सुनने (Eavesdropping) के लिए आक्रामक रूप से पीछे पड़ी हैं, जो ईरान के साथ युद्ध टालने की रणनीति बना रहे हैं। इजरायल के इस खतरनाक सर्विलांस के राडार पर मुख्य रूप से तीन बड़े नाम हैं:
- स्टीव विटकोफ: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद खास और विशेष दूत।
- एलब्रिज ए. कोल्बी: पेंटागन के शीर्ष नीति अधिकारी, जो संयमित विदेश नीति की वकालत करने के लिए जाने जाते हैं।
- माइकल पी. डिमिनो IV: कोल्बी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक।
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इजरायल, राष्ट्रपति ट्रंप की युद्ध को लेकर रणनीति और शांति वार्ता पर उनके बदलते रुख की हर एक गुप्त जानकारी समय से पहले चुराना चाहता है।
"अनहिंज्ड" जासूसी: होटलों में बर्नर फोन का इस्तेमाल और स्पाईवेयर का जाल
डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) के अधिकारियों ने इस खुफिया आक्रामकता को "अनहिंज्ड" (बेकाबू और असामान्य) करार दिया है। तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि इजरायल में या इजरायली अधिकारियों के साथ काम कर रहे कई अमेरिकी रक्षा कर्मियों के फोन में चुपके से बातचीत सुनने वाला स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर दिया गया था।
खौफ का आलम: स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब वरिष्ठ अमेरिकी प्रतिनिधि इजरायल दौरों के दौरान होटल के कमरों में सीक्रेट बातचीत करने के लिए सामान्य फोन छोड़ 'बर्नर फोन' (अस्थायी और ट्रेस न होने वाले फोन) का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
शिन बेट की वो करतूत: सीक्रेट सर्विस की गाड़ी में लगाया था लिसनिंग डिवाइस!
हैरानी की बात यह है कि यह जासूसी कोई पहली बार नहीं हो रही है, लेकिन इस बार इजरायल ने सारी हदें पार कर दी हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने याद दिलाया कि इस सर्विलांस की शुरुआत 2024 के आखिर में तब तेज हुई थी, जब तत्कालीन बाइडेन प्रशासन ने इजराइल पर गाजा में हमले रोकने का दबाव डाला था।
इससे पहले भी इजरायल रंगे हाथों पकड़ा जा चुका है। पिछले साल, इजरायल की घरेलू खुफिया एजेंसी 'शिन बेट' के अधिकारियों को अमेरिकी सीक्रेट सर्विस की एक गाड़ी में गुप्त रूप से सुनने वाला उपकरण (Listening Device) लगाने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था। वहीं, साल 2021 में इजराइली सैन्य खुफिया अधिकारी खुद वाशिंगटन स्थित DIA मुख्यालय के भीतर जासूसी उपकरण फिट करते हुए दबोचे गए थे।
पुरानी घटनाएं फिर क्यों याद आ रही हैं?
यह पहली बार नहीं है जब इज़रायल पर अमेरिकी संस्थानों की निगरानी के आरोप लगे हों। पूर्व में भी कथित तौर पर सुनने वाले उपकरण लगाने और अमेरिकी सुरक्षा ढांचे तक पहुंच बनाने के प्रयासों की खबरें सामने आती रही हैं। इसी वजह से नई रिपोर्ट ने पुराने मामलों को फिर चर्चा में ला दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह केवल जासूसी का मामला नहीं रहेगा बल्कि दो करीबी सहयोगियों के बीच विश्वास के संकट का संकेत भी बन सकता है।
ट्रंप और नेतन्याहू में तीखी बहस: क्या टूट जाएगा दोनों देशों का सैन्य तालमेल?
यह खुफिया रिपोर्ट ऐसे नाजुक मोड़ पर आई है जब वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) के हालातों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। खबरों के मुताबिक, पिछले ही हफ्ते ईरान के साथ युद्ध और लेबनान में इज़राइली सैन्य अभियानों को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर बेहद तीखी बहस हुई थी। पेंटागन की इस नई 'क्रिटिकल' चेतावनी के बाद अब 'US सेंट्रल कमांड' और इज़राइल के बीच ईरान के खिलाफ साझी सैन्य रणनीति बनाने में भारी रुकावट आ सकती है। सूत्रों का कहना है कि भड़के हुए अमेरिकी अधिकारी अब इजरायल के साथ खुफिया जानकारी साझा करने (Information Sharing) पर बेहद सख्त और नई पाबंदियां लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जो इजरायल के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।


