ब्रिटेन के लीसेस्टर में सितंबर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। इसके लिए सोशल मीडिया पर कुछ लोगों के समूह ने हिंदुत्व आतंकवाद की नकली कहानी बनाई थी।

लीसेस्टर। ब्रिटेन के लीसेस्टर में सितंबर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है कि हिंसा एक साजिश के तहत हुई थी। इसके लिए सोशल मीडिया पर कुछ लोगों के समूह ने हिंदुत्व आतंकवाद की नकली कहानी बनाई थी। इन लोगों में से कुछ के संबंध आतंकवादियों से भी हैं। 

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लीसेस्टर में 4-20 सितंबर के बीच हिंसा हुई थी। इसका असर बर्मिंघम तक फैल गया था। इस दौरान पूजा स्थलों पर हमले किए गए और छुरा घोंपने की घटनाएं हुईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने साजिश के तहत दोनों समुदायों के बीच तनाव बढ़ाया था। उन्होंने हिंदू चरमपंथ की झूठी कहानियां बनाई थी। 

सजायाफ्ता आतंकवादी ने फैलाया नफरत
रिपोर्ट में शार्लोट ने लिखा है कि हिंदुत्व चरमपंथ की नकली कहानियां सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले इन्फ्लुएंसर्स में एक सजायाफ्ता आतंकवादी और एक ऐसा व्यक्ति शामिल है जो तालिबान और ISIL लड़ाकों का समर्थक रहा है। ऐसे लोगों ने फर्जी खबरें फैलाकर सामुदायिक तनाव भड़काया। मुख्यधारा के मीडिया और राजनीतिक नेताओं का सहयोग भी ऐसे लोगों को मिला, जिससे पूजा स्थलों पर हमले हुए और हिंदू समुदाय की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडिया ने तनाब बढ़ाने वाले इन्फ्लुएंसर्स पर भरोसा किया। मीडिया ने घटनाओं का बारीक और सटीक विश्लेषण करने के बदले हिंदुत्व चरमपंथ और भारत की राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया और ऐसे इन्फ्लुएंसर्स के कमेंट दिखाएं जो हिंदुओं के प्रति नफरत फैला रहे थे। इससे मामला और उलझ गया था। थिंक-टैंक द्वारा की गई जांच से पता चला है कि जिन लोगों पर 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आतंकवादी' होने का आरोप लगाया गया था, उनका दक्षिणपंथी संगठन से कोई संबंध नहीं था। 

झूठे आरोपों ने हिंदू समुदाय को खतरे में डाला 
थिंक-टैंक ने हिंसा से संबंधित पुलिस रिपोर्ट की बारीकी से समीक्षा की। इसके साथ ही हिंदू मार्च का आयोजन करने वाले लोगों से बातचीत की। इन लोगों पर आरएसएस के आतंकवादी होने का आरोप लगाया गया था। थिंक-टैंक को पता चला कि उनका किसी भी आतंकवादी संगठन से संबंध नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान सबूतों के साथ यह दावा नहीं किया जा सकता कि ब्रिटेन में कोई हिंदू राष्ट्रवादी उग्रवाद नहीं है, लेकिन यह इस बात का सबूत है कि जिन लोगों ने हिंदू विरोध का आयोजन किया था वे अभी तक किसी चरमपंथी या आतंकवादी संगठन के सदस्य नहीं थे। ब्रिटेन में सक्रिय आरएसएस के आतंकवादियों और हिंदुत्व चरमपंथी संगठनों के झूठे आरोपों ने हिंदू समुदाय को खतरे में डाल दिया है।