अमेरिका-इजरायल युद्ध में ईरान को सैन्य और रणनीतिक नुकसान हुआ है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, भले ही सत्ता परिवर्तन न हुआ हो, लेकिन ईरान की ताकत कमजोर करने में गठबंधन की रणनीति सफल मानी जा रही है।
Iran-Israel War Day 18: मिडिल-ईस्ट में युद्ध की वजह से संकट गहराता जा रहा है। इजराइल-अमेरिका ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की शुरुआत की। हालांकि, युद्ध को 18 दिन हो चुके हैं और अब सवाल उठ रहा है कि क्या तेहरान में सत्ता बदलने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया और मिशन असफल हो गया है। आइए जानते हैं, इस बारे में क्या कह रहे एक्सपर्ट।
एक्सपर्ट की राय: मिशन पूरी तरह फेल नहीं
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञ मुहानद सलेम का मानना है कि भले ही सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ, लेकिन ईरान को कमजोर करने की रणनीति सफल होती दिख रही है। दोहा में प्रोफेसर मुहानद सलेम ने अल जजीरा में लिखे अपने आर्टिकल में कहा है कि यह कहना गलत होगा कि अमेरिका और इजरायल बिना किसी प्लानिंग के युद्ध में फंस गए हैं।
ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान
सलेम के अनुसार, इस युद्ध में ईरान के कई अहम सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जैसे- बैलिस्टिक मिसाइल जखीरा, परमाणु ढांचा, हवाई सुरक्षा प्रणाली, नौसेना क्षमताएं और प्रॉक्सी कमांड नेटवर्क। उनका कहना है कि ईरान ने जो हथियारों का जखीरा कई दशकों में तैयार किया था, वो बहुत तेजी से खत्म हो रहा है।
नौसेना और एयर डिफेंस पर असर
ईरान के नेवल एसेट्स जैसे फास्ट-अटैक क्राफ्ट, छोटी सबमरीन और माइन बिछाने की क्षमता को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, एयर डिफेंस सिस्टम इतना कमजोर हो चुका है कि अमेरिका अब ईरानी एयरस्पेस में नॉन-स्टील्थ B-1 बॉम्बर भी उड़ा पा रहा है। इससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
युद्ध के दो चरण: रणनीतिक हमले
यह सैन्य अभियान दो अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ा है। पहले चरण में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड और कंट्रोल नेटवर्क, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च सिस्टम को टारगेट किया गया। 2 मार्च तक अमेरिका ने पश्चिमी ईरान और तेहरान के आसपास स्थानीय एयर सुपीरियरिटी का दावा भी किया था।
दूसरा चरण: डिफेंस इंडस्ट्री पर फोकस
अब युद्ध का दूसरा चरण जारी है, जिसमें ईरान के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को निशाना बनाया जा रहा है। इसमें मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियां, डुअल-यूज रिसर्च सेंटर, अंडरग्राउंड सैन्य ठिकाने नेस्तनाबूद किए जा रहे हैं। ईरान के खिलाफ यह अभियान सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है, ताकि नष्ट की गई क्षमताओं को दोबारा खड़ा न किया जा सके।
ईरान की रणनीतिक दुविधा
ईरान इस समय एक बड़ी रणनीतिक समस्या का सामना कर रहा है। अगर वह बची हुई मिसाइलें इस्तेमाल करता है, तो उसके लॉन्चर उजागर हो जाते हैं और तुरंत नष्ट किए जा सकते हैं अगर वह उन्हें बचाकर रखता है, तो वह जवाबी हमला करने की क्षमता खो देता है। मिसाइल और ड्रोन डेटा से संकेत मिलता है कि ईरान अब लगातार हमले करने के बजाय सीमित और समयबद्ध हमले कर रहा है।
क्या युद्ध रणनीति काम कर रही है?
इस युद्ध में ईरान को जान-माल दोनों का भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सर्वोच्च नेता की मौत की खबर सामने आई है। नए नेता के घायल होने की भी बात कही जा रही है। ईरान की प्रमुख सैन्य ताकत जैसे मिसाइल, परमाणु ढांचा, एयर डिफेंस, नौसेना और प्रॉक्सी नेटवर्क काफी कमजोर हो चुके हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि दुश्मन की क्षमताओं को कमजोर करने के आधार पर देखा जाए, तो अमेरिका और इजरायल की रणनीति सफल होती नजर आ रही है।


