मालदीव ने अपने सबसे बड़े सहयोगी चीन को आंख दिखाने की कोशिश की है। राष्ट्रपति मोहम्मद मूइज्जु के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने गुरुवार (9 मई) को कहा कि उनकी सरकार ने हिंद महासागर में रिसर्च करने के लिए चीनी जहाज को अनुमति देने से मना कर दिया है।

मालदीव। मालदीव ने अपने सबसे बड़े सहयोगी चीन को आंख दिखाने की कोशिश की है। राष्ट्रपति मोहम्मद मूइज्जु के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने गुरुवार (9 मई) को कहा कि उनकी सरकार ने हिंद महासागर में रिसर्च करने के लिए चीनी जहाज को अनुमति देने से मना कर दिया है। इस बात से भारत को कहीं-न-कहीं राहत का सांस ले रहा होगा। आपको बता दें कि हाल ही में मालदीव के विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आए थे, जहां उनकी मुलाकात एस जयशंकर से हुई थी। इसके बाद चीन के खिलाफ लिया गया फैसला भारत के लिए पॉजिटिव मैसेज है।

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चीन का रिसर्च शिप जियांग यांग होंग 3 दूसरी बार मालदीव लौटने वाला था। हालांकि, इस बार उसे ठहरने से मना कर दिया गया है। इस पर मूसा ज़मीर ने कहा कि हिंद महासागर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए हमारे लिए जरूरी है। ये हमारे पड़ोसी मुल्क भारत और श्रीलंका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए हम साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

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 मालदीव के विदेश मंत्री मूसा ज़मीर का बयान

मालदीव के विदेश मंत्री मूसा ज़मीर ने कहा कि मालदीव के जल क्षेत्र में रिसर्च शिप का स्वागत नहीं है। हमने मालदीव के जल क्षेत्र में रिसर्चके लिए चीनी जहाज को अनुमति नहीं दी है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने 27 अप्रैल को चीन का रिसर्च शिप जियांग यांग होंग 3 मालदीव के जलक्षेत्र में लौट आया था। हालांकि, इस बार रक्षा मंत्री घासन मौमून ने भी बताया था कि चीनी जहाज मालदीव के जल क्षेत्र के अंदर है, लेकिन वो किसी भी तरह का रिसर्च नहीं करेगा।

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