रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने कहा है कि लूना-25 (Luna-25) अंतरिक्ष यान को चंद्रमा के ऊपर एक आपातकालीन स्थिति का सामना करना पड़ा है। इस समस्या का विश्लेषण किया जा रहा है। 

मॉस्को। भारत द्वारा चंद्रयान-3 लॉन्च करने के बाद रूस ने भी रेस लगाते हुए अपने अंतरिक्ष यान Luna-25 को चंद्रमा पर उतरने के लिए भेजा है। चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला है। इसी तरह Luna-25 भी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुप पर लैंडिंग करने जा रहा है। इस बीच रूस के लिए एक चिंताजनक खबर आई है। इससे Luna-25 की लैंडिंग पर सवाल उठने लगे हैं।

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रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने कहा है कि लूना-25 को चंद्रमा के ऊपर आपातकालीन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इसका अगर लूना-25 पर कितना हुआ है इसकी जांच की जा रही है। रोस्कोस्मोस ने कहा, "आज, उड़ान कार्यक्रम के अनुसार 14:10 बजे (मास्को के समय अनुसार) लूना-25 ने प्री-लैंडिंग कक्षा में स्थानांतरण के लिए एक आवेग दिया। ऑपरेशन के दौरान Luna-25 पर एक आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हुई। इसके चलते तय किए गए मापदंड के अनुसार अंतरिक्ष यान मनुवर नहीं कर सका।"

10 अगस्त को लॉन्च किया गया था Luna-25

रूस ने Luna-25 को 10 अगस्त को लॉन्च किया था। यह इस सप्ताह की शुरुआत में चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया था। इसके बाद से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। लूना-25 अगर सफलतापूर्वक लैंड कर पाता है तो यह एक साल तक चंद्रमा पर रिसर्च करेगा। यह चंद्रमा की चट्टान और धूल के नमूने लेगा और उसकी जांच करेगा। यह पानी की तलाश करेगा। दरअसल, चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिकों के लिए विशेष रुचि रखता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि स्थायी रूप से छाया में रहने वाले चंद्रमा के इस हिस्से में पानी हो सकता है।

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चंद्रयान-3 से 28 दिन बाद लॉन्च हुआ था Luna-25

भारत ने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को लॉन्च किया था। इसके 28 दिन बाद रूस ने Luna-25 को लॉन्च किया। लूना अपने शक्तिशाली सोयुज 2.1v रॉकेट के दम पर मात्र छह दिन में चंद्रमा की कक्षा तक पहुंच गया। चंद्रयान-3 को चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने में 23 दिन लगे। चंद्रयान 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर लैंड करने वाला है। वहीं, लूना-25 के 21 अगस्त को ही चंद्रमा पर लैंडिग की बात कही गई है।