बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता समी दीन बलूच ने बलूचिस्तान में छात्रों की जबरन गुमशुदगी बढ़ने पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यह 'अमानवीय' नीति प्रांत में शांति लाने में विफल रही है और युवाओं में गुस्सा और हिंसा को बढ़ावा दे रही है.

बलूचिस्तान [पाकिस्तान], 19 जुलाई (ANI): बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता समी दीन बलूच ने बलूचिस्तान में छात्रों की कथित जबरन गुमशुदगी में हालिया वृद्धि पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि पिछले कुछ दिनों में यह सिलसिला और तेज हो गया है.

X पर पोस्ट किए गए एक बयान में समी दीन ने कहा, "बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का सिलसिला कभी भी सही मायने में नहीं रुका, लेकिन पिछले कुछ दिनों में विशेष रूप से छात्रों की जबरन गुमशुदगी में खतरनाक रूप से वृद्धि हुई है." उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण राजनीतिक संगठनों से जुड़े छात्रों और युवाओं को उनके घरों, हॉस्टलों और शैक्षणिक संस्थानों से उठाया जा रहा है.

'विफल और अमानवीय सरकारी नीति'

इस प्रथा को "विफल और अमानवीय सरकारी नीति" बताते हुए उन्होंने तर्क दिया कि उग्रवाद-विरोधी अभियान के नाम पर जबरन गुमशुदगी का इस्तेमाल प्रांत में स्थिरता नहीं ला पाया है. उन्होंने कहा, "अगर यह तरीका वास्तव में शांति लाने का एक साधन होता, तो बलूचिस्तान आज खून, अशांति और नफरत के इस दलदल में नहीं डूब रहा होता." उन्होंने आगे कहा कि ऐसी नीतियां केवल आक्रोश और हिंसा को गहरा करती हैं.

समी दीन ने आगे दावा किया कि लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सालों तक हिरासत में रखा जा रहा है और उन्हें यातना और अपमान का शिकार बनाया जा रहा है. उनके अनुसार, इस तरह की कार्रवाइयां प्रभावित युवाओं में गुस्सा और बदले की भावना पैदा करती हैं, जिनमें से कुछ बाद में हिंसा का सहारा लेते हैं.

सरकार पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी इसके बाद मूल कारणों की जांच करने के बजाय, जबरन गुमशुदगी के खिलाफ अभियान चलाने वालों पर उग्रवाद को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाते हैं. उन्होंने सरकार पर शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया.

समी दीन ने कहा कि अस्थिरता के असली कारक "अवैध कार्रवाइयां, सरकारी दमन और अत्याचारी नीतियां" हैं, जो उनके अनुसार, संघर्ष को हल करने के बजाय दुश्मनी को बढ़ावा दे रही हैं.

अपने बयान के अंत में, समी दीन ने अधिकारियों से आलोचकों को निशाना बनाने के बजाय अपने दृष्टिकोण का पुनर्मूल्यांकन करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात पर विचार करना चाहिए कि दशकों के कथित दमन, जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याओं और सामूहिक दंड के बावजूद बलूचिस्तान में स्थायी शांति क्यों नहीं स्थापित हो पाई है.

आरोपों पर पाकिस्तानी सरकार का पक्ष

पाकिस्तानी सरकार पहले भी व्यवस्थित रूप से जबरन गुमशुदगी के आरोपों को खारिज करती रही है. सरकार का कहना है कि उसके सुरक्षा अभियान कानून के अनुसार चलाए जाते हैं और इनका उद्देश्य उग्रवाद का मुकाबला करना और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है. (ANI)

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