Pew Research की रिपोर्ट के मुताबिक, 2100 तक इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा धर्म बन सकता है। हिंदू धर्म दूसरे और ईसाई धर्म तीसरे स्थान पर रह सकता है। जानिए किसकी कितनी होगी आबादी?
Pew Research Study: अमेरिकी ग्लोबल थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की एक स्टडी के मुताबिक, 21वीं सदी के अंत तक दुनिया के धार्मिक परिदृश्य में बड़े बदलाव का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा डेमोग्राफिक ट्रेंड इसी तरह जारी रहते हैं, तो 2100 तक इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा रिलीजन बन सकता है।अनुमान के अनुसार, उस समय दुनिया में मुस्लिम आबादी करीब 3.91 अरब हो सकती है। वहीं, हिंदू धर्म के मानने वालों की संख्या करीब 3.78 अरब और ईसाई धर्म के मानने वालों की संख्या करीब 3.1 अरब रहने का अनुमान है।
मुस्लिम आबादी बढ़ने की क्या है वजह?
रिसर्च के मुताबिक, मुस्लिम आबादी में तेज बढ़ोतरी के पीछे कई डेमोग्राफिक कारण हो सकते हैं। इनमें मुस्लिम-बहुल देशों में अपेक्षाकृत ज्यादा फर्टिलिटी रेट, युवाओं की बड़ी आबादी और अलग-अलग क्षेत्रों में तेजी से हो रहे जनसंख्या बदलाव प्रमुख कारण बताए गए हैं। इन बदलावों के चलते 21वीं सदी के अंत तक दुनिया में धार्मिक समूहों की मौजूदा स्थिति बदलने की संभावना जताई गई है।
हिंदू धर्म दूसरे और ईसाई तीसरे स्थान पर
प्यू रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, 2100 तक हिंदू धर्म दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म हो सकता है। हिंदू धर्म को मानने वालों की संख्या करीब 3.78 अरब रहने का अनुमान है। वहीं, ईसाई पंथ करीब 3.1 अरब अनुयायियों के साथ तीसरे स्थान पर रह सकता है। इस तरह तीनों प्रमुख धर्मों के बीच आबादी के लिहाज से काफी करीबी मुकाबला देखने को मिल सकता है।
2100 तक कितनी होगी नास्तिकों की आबादी?
रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग खुद को किसी धर्म से नहीं जोड़ते या नास्तिक हैं, उनकी संख्या भी बढ़ने की संभावना है। 2100 तक ऐसे लोगों की आबादी करीब 1.09 अरब तक पहुंच सकती है। वहीं, पारंपरिक और स्थानीय पंथों को मानने वालों की कुल संख्या करीब 22.42 करोड़ रहने का अनुमान है। दुनिया भर में यहूदी आबादी करीब 1.96 करोड़ तक रहने का अनुमान लगाया गया है।
सिंगापुर दुनिया का सबसे धार्मिक विविधता वाला देश
प्यू रिसर्च सेंटर की एक अन्य स्टडी के मुताबिक, सिंगापुर दुनिया का सबसे ज्यादा धार्मिक विविधता वाला देश है। सिंगापुर में बौद्ध धर्म मानने वाले लोग सबसे बड़ा धार्मिक समूह हैं और उनकी आबादी करीब 31% है। इसके अलावा करीब 20% लोग किसी धर्म को नहीं मानते। देश में ईसाइयों की आबादी करीब 19%, मुस्लिम आबादी 16% और हिंदू आबादी करीब 5% है। अन्य धर्मों को मानने वालों की हिस्सेदारी करीब 9% है।
धार्मिक विविधता में सूरीनाम दूसरे स्थान पर
धार्मिक विविधता के मामले में सूरीनाम दूसरे स्थान पर है। यह टॉप 10 में शामिल एकमात्र लैटिन अमेरिकी देश है। सूरीनाम की करीब 53% आबादी ईसाई है। इसके अलावा करीब 22% लोग हिंदू, 13% मुस्लिम और 8% लोग किसी धर्म को नहीं मानते। देश की बाकी आबादी अन्य धार्मिक समूहों से जुड़ी है।
अमेरिका में हिंदू शिक्षा में सबसे आगे
प्यू रिसर्च सेंटर की अमेरिका से जुड़ी एक अन्य स्टडी के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाला हिंदू समुदाय उच्च शिक्षा के मामले में सबसे आगे है। रिपोर्ट में हिंदुओं ने शिक्षा के स्तर पर पारंपरिक रूप से सबसे शिक्षित माने जाने वाले यहूदी समुदाय को भी पीछे छोड़ दिया है। यह आंकड़ा अमेरिका में रहने वाले हिंदू समुदाय की उच्च शैक्षणिक योग्यता को दिखाता है। रिपोर्ट में अमेरिकी समाज और अर्थव्यवस्था में हिंदू समुदाय की भूमिका पर भी ध्यान दिया गया है।
70% अमेरिकी हिंदुओं के पास बैचलर डिग्री या उससे ज्यादा शिक्षा
Religious Landscape Study (RLS) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में रहने वाले करीब 10 में से 7 हिंदुओं यानी 70% लोगों के पास बैचलर डिग्री या उससे उच्च स्तर की शिक्षा है। वहीं, शिक्षा के मामले में दूसरे स्थान पर रहने वाले अमेरिकी यहूदी समुदाय के करीब 65% लोगों के पास बैचलर डिग्री या उससे अधिक शिक्षा है।


