हिंदू धर्म में कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें भगवान का ही स्वरूप माना जाता है। शालिग्राम शिला भी उन्हीं में से एक है। देखने में ये भले ही एक साधारण पत्थर लगे, लेकिन भक्त इसे साक्षात भगवान विष्णु का ही अवतार मानते हैं। तुलसी के पौधे के पास शालिग्राम शिला को रखकर पूजा करने की परंपरा है।

उज्जैन. देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi 2021) पर ये तुलसी-शालिग्राम विवाह करने की परंपरा है। इस बार ये एकादशी 15 नवंबर, सोमवार को है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जिन घरों में तुलसी के साथ शालिग्राम की पूजा की जाती है, वहां दरिद्रता नहीं आती। भगवान विष्णु की यह शिला नेपाल की गंडकी नदी में मिलती है, जिन पर कीड़ों द्वारा काटने का चिह्न होता है। इसे स्वयंभू माना जाता है यानी इनकी प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती। कोई भी व्यक्ति इन्हें घर या मंदिर में स्थापित करके पूजा कर सकता है। शालिग्राम शिला को घर में रखने के कई नियम हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है। साथ ही इससे कई प्रकार के फायदे भी होते हैं। आगे जानिए शालिग्राम शिला से जुड़ा खास बातें…

1. जहां भगवान शालिग्राम की पूजा होती है, वहां विष्णुजी के साथ महालक्ष्मी भी निवास करती हैं। जिस घर में शालिग्राम की रोज पूजा होती है, वहां के सभी दोष और नकारात्मकता खत्म हो जाती है।
2. शालिग्राम अलग-अलग रूपों में मिलते हैं। कुछ अंडाकार होते हैं तो कुछ में एक छेद होता है। इस पत्थर में शंख, चक्र, गदा या पद्म से निशान बने होते हैं।
3. भगवान् शालिग्राम की पूजा तुलसी के बिना पूरी नहीं होती है और तुलसी अर्पित करने पर वे तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं।
4. शालिग्राम और भगवती स्वरूपा तुलसी का विवाह करने से सारे अभाव, कलह, पाप, दुःख और रोग दूर हो जाते हैं। ये कार्य देवप्रबोधिनी एकादशी पर करना चाहिए।
5. तुलसी शालिग्राम विवाह करवाने से वही पुण्य फल प्राप्त होता है जो कन्यादान करने से मिलता है।
6. पूजा में शालिग्राम को स्नान कराकर चंदन लगाएं और तुलसी अर्पित करें। भोग लगाएं। यह उपाय तन, मन और धन सभी परेशानियां दूर कर सकता है।
7. विष्णु पुराण के अनुसार जिस घर में भगवान शालिग्राम हो, वह घर तीर्थ के समान होता है।
8. पूजा में शालिग्राम पर चढ़ाया हुआ भक्त अपने ऊपर छिड़कता है तो उसे तीर्थों में स्नान के समान पुण्य फल मिलता है।
9. जो व्यक्ति शालिग्राम पर रोज जल चढ़ाता है, वह अक्षय पुण्य प्राप्त करता है।
10. शालिग्राम को अर्पित किया हुआ पंचामृत प्रसाद के रूप में सेवन करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। 

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