इस बार 23 फरवरी, मंगलवार को माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इसे जया, अजा व भीष्म एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है।

उज्जैन. भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था कि जया एकादशी बहुत ही पुण्यदायी है। इस एकादशी का व्रत विधि-विधान करने से तथा ब्राह्मण को भोजन कराने से व्यक्ति नीच योनि जैसे भूत, प्रेत, पिशाच की योनि से मुक्त हो जाता है।

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इस विधि से करें जया एकादशी
- व्रती (व्रत रखने वाले) दशमी तिथि को भी एक समय भोजन करें। इस बात का ध्यान रखें की भोजन सात्विक हो। एकादशी तिथि की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान श्रीविष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प करें।
- इसके बाद धूप, दीप, चंदन, फल, तिल, एवं पंचामृत से भगवान विष्णु की पूजा करें। पूरे दिन व्रत रखें। संभव हो तो रात्रि में भी व्रत रखकर जागरण करें। अगर रात्रि में व्रत संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
- द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उन्हें जनेऊ व सुपारी देकर विदा करें फिर भोजन करें। इस प्रकार नियमपूर्वक जया एकादशी का व्रत करने से महान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
- धर्म शास्त्रों के अनुसार, जो जया एकादशी का व्रत करते हैं उन्हें पिशाच योनि में जन्म नहीं लेना पड़ता।

ये उपाय करें
1.
एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी का अभिषेक गाय के दूध से करें। इससे धन लाभ के योग बनते हैं।
2. भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, पीले रंग की मिठाई चढ़ाएं। इस उपाय से गुरु ग्रह के दोष भी कम होते हैं।
3. एकादशी पर पीपल पर जल चढ़ाएं और पूजा करें। पीपल भी भगवान विष्णु की ही स्वरूप माना गया है।
4. गाय के दूध से खीर बनाएं, उसमें थोड़ा केसर भी डालें। इसका भोग भगवान विष्णु को लगाएं। भोग लगाने से पहले खीर में तुलसी के पत्ते जरूर डालें।

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