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आचार्य चाणक्य ने 2 सूत्रों में बताया है कैसा होना चाहिए विवाहित महिलाओं का आचरण

चाणक्य नीति आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित महान ग्रंथ है। इसमें उन्होंने मनुष्यों के कल्याण के लिए कई सूत्र दिए हैं। उनके ये सूत्र लोगों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करते हैं।

Know from Chanakya Niti, how a married women behavior should be KPI
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Ujjain, First Published Jul 15, 2021, 9:13 AM IST
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उज्जैन. चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने विवाहित महिलाओं के आचरण और व्यवहार के बारे में भी अपने विचार बताए हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार विवाहित स्त्रियां अपने अच्छे आचरण से घर को स्वर्ग बना देती हैं। इसलिए उनका आचरण हमेशा आदर्श के रूप में स्थापित होना चाहिए। चाणक्य नीति के एक श्लोक में लिखा है..

श्लोक 1
न दानैः शुद्ध्यते नारी नोपवासशतैरपि । 
न तीर्थसेवया तद्वद् भर्तु: पादोदकैर्यथा ।। 

अर्थ- विवाहित महिलाओं को अपने पति की सेवा करनी चाहिए। जो महिलाएं अपने पति की सेवा करती हैं उनका जीवन धन्य हो जाता है। सुहागिन महिलाओं के लिए पति की सेवा उसका सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। इसलिए सभी स्त्रियों को अपना पत्नी धर्म निभाते हुए पति की सेवा करनी चाहिए।

श्लोक 2
पत्युराज्ञां विना नारी उपोष्य व्रतचारिणी। 
आयुष्यं हरते भर्तुः सा नारी नरकं व्रजेत्।। 

अर्थ- विवाहित महिला को अपने पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए। व्रत भी अपने पति से पूछकर रखना चाहिए। सुहागिन महिलाओं को सच्ची श्रद्धा के साथ पतिव्रता धर्म का पालन करना चाहिए। इसके फलस्वरूप उस महिला को लोक-परलोक सुधर जाते हैं।

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