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24 जुलाई तक रहेगा हिंदू कैलेंडर का चौथा महीना आषाढ़, इस महीने में मनाएं जाएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार

हिंदू कैलेंडर का नया महीना आषाढ़ 25 जून से शुरू हो चुका है, जो 24 जुलाई तक रहेगा। इस महीने में भड़ली नवमी और देवशयनी एकादशी जैसे बड़े व्रत और पर्व रहेंगे।

Know the major festivals and fast to be celebrated in Ashad Maas KPI
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Ujjain, First Published Jun 25, 2021, 3:15 PM IST
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उज्जैन. हिंदू कैलेंडर का नया महीना आषाढ़ 25 जून से शुरू हो चुका है, जो 24 जुलाई तक रहेगा। इस महीने में भड़ली नवमी और देवशयनी एकादशी जैसे 10 बड़े व्रत और पर्व रहेंगे। इनमें हलहारिणी अमावस्या, गुप्त नवरात्र, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा महोत्सव और गुरु पूर्णिमा आदि प्रमुख हैं। आषाढ़ महीने में ही सूर्य कर्क संक्रांति भी रहेगी यानी सूर्य मिथुन से कर्क में आ जाएगा और दक्षिणायन की शुरुआत होगी। आगे जानिए आषाढ़ मास के प्रमुख व्रत और त्योहारों के बारे में…

योगिनी एकादशी- 5 जुलाई को आषाढ़ के कृष्णपक्ष की एकादशी रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार और योगीराज श्रीकृष्ण की पूजा की भी परंपरा है।
हलहारिणी अमावस्या- 9 जुलाई को आषाढ़ महीने की अमावस्या है। इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं। इस पर्व पर स्नान-दान के साथ पितरों के श्राद्ध करने की परंपरा है साथ ही इस दिन धरती देवी की विशेष पूजा की जाती है।
गुप्त नवरात्र- 11 जुलाई से गुप्त नवरात्र शुरू होंगे। इसमें साधना का विशेष महत्व रहेगा। भक्त तंत्र, मंत्र साधना करेंगे।
रथयात्रा महोत्सव- 12 जुलाई को रथ यात्रा महोत्सव मनाया जाएगा। भगवान जगन्नाथजी की यात्रा का निकलेगी। इस दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग भी रहेगा।
विनायक चतुर्थी व्रत- 13 जुलाई को गणेश जी के लिए व्रत रखने की तिथि विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी। इस बार ये मंगलवार को होने से अंगारकी चतुर्थी रहेगी।
कर्क संक्रांति- 16 जुलाई को सूर्य मिथुन से निकलकर कर्क में आ जाएगा। इस दिन से दक्षिणायन की शुरुआत भी मानी जाती है। इस पर्व पर स्नान-दान और सूर्य पूजा की परंपरा है।
भड़ली नवमी- 18 जुलाई को भड़ली नवमी रहेगी। राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कुछ राज्यों में ये तिथि विवाह और सभी मांगलिक कामों के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है।
देवशयनी एकादशी- 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इस संबंध में मान्यता है कि इस तिथि से चार माह के लिए भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करने चले जाते हैं और फिर देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इसी दिन से चातुर्मास भी शुरू हो जाएंगे। इन चार माह में मांगलिक व शुभ कार्य वर्जित रहते हैं।

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