हिंदू कैलेंडर के अनुसार, एक साल में 12 महीने होते हैं। इनमें से दूसरा महीना वैशाख है। इस महीने की अंतिम तिथि यानी पूर्णिमा पर चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम वैशाख रखा गया है।

उज्जैन. धर्म ग्रंथों में हर महीने से जुड़ी कई नियम व परंपराएं बताई गई हैं। ऐसी ही एक परंपरा वैशाख मास से भी जुड़ी है। इस महीने में शिवलिंग के ऊपर गलंतिका (एक मटकी जिसमें से बूंद-बूंद पानी टपकता रहता है) बांधी जाती है। इस परंपरा के पीछे धार्मिक कारण छिपा है। कुछ स्थानों पर तो एक से अधिक गलंतिका बांधने की परंपरा भी है। आगे जानिए क्या है इस परंपरा के छिपा धार्मिक कारण…

इसलिए शिवलिंग के ऊपर बांधते हैं गलंतिका
- धर्म ग्रंथों के अनुसार वैसाख मास में भीषण गर्मी पड़ती है, जिससे शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है और मौसमजन्य बीमारियों का सामना करना पड़ता है। कुछ ऐसी ही मान्यता भगवान शिव से भी जुड़ी है।
- इस मान्यता के अनुसार, जब समुद्र मंथन में सबसे पहले कालकूट नामक भयंकर विष निकला था तो पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया था। तब सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष को पी लिया था और अपने गले में रोक लिया था।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास में जब भीषण गर्मी पड़ती है, तब महादेव पर भी विष का असर होने लगता है और उनके शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। उसे तापमान को नियंत्रित रखने के लिए ही शिवलिंग पर गलंतिका बांधी जाती है। जिसमें से बूंद-बूंद टपकता जल शिवजी को ठंडक प्रदान करता है।

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इस परंपरा से सीखें ये बातें
- जब वैशाख मास में सूर्यदेव पृथ्वी के अधिक निकट होते हैं, तब उनके ताप से पृथ्वी भी जलने लगती है यानी अत्यधिक गर्म हो जाती है। इसका असर हर जीवित प्राणी और पेड़-पौधों पर भी पड़ता है।
- सूर्य के अत्यधिक ताप के कारण कई तरह की मौसमजनित बीमारियां फैलने की डर बना रहता है। उससे बचने के लिए जितना हो सके पानी पीना चाहिए। इससे शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति नहीं बनती और बीमारी होने की खतरा भी नहीं रहता।
- वैशाख मास में शिवलिंग के ऊपर बांधी जाने वाली गलंतिका इस बात का संकेत करती है कि जब सूर्य का ताप अधिक हो तो पानी पीकर ही हम स्वयं को स्वस्थ रख सकते हैं और गर्मी को नियंत्रित कर सकते हैं।

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