Janmashtami पर इस मंदिर में देते हैं भगवान को 21 तोपों की सलामी, औरंगजेब ने भी माना था यहां का चमत्कार

Published : Aug 27, 2021, 10:12 AM ISTUpdated : Aug 27, 2021, 11:59 AM IST
Janmashtami पर इस मंदिर में देते हैं भगवान को 21 तोपों की सलामी, औरंगजेब ने भी माना था यहां का चमत्कार

सार

इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami) 30 अगस्त, सोमवार को है। इस दिन सभी कृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा और पूजा की जाती है। कुछ मंदिरों में विशेष परंपराएं भी इस दिन निभाई जाती है। ऐसी ही एक परंपरा राजस्थान (Rajasthan) के नाथद्वारा (Nathdwara) में स्थित श्रीनाथ (Shrinath Temple) मंदिर में भी है।

उज्जैन. राजस्थान (Rajasthan) के श्रीनाथ (Shrinath Temple) मंदिर में जन्माष्टमी (Janmashtami) की रात 12 बजते ही भगवान को 21 तोपों की सलामी दी जाती है। श्रीनाथ (Shrinath Temple) जी का यह मंदिर उदयपुर (Udaipur) से उत्तर पूर्वी दिशा में 48 किमी की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर से जुड़ी और भी कई किवदंतियां और परंपराएं इसे और भी खास बनाती हैं।

ऐसा है मूर्ति का स्वरूप
श्रीनाथजी मंदिर (Shrinath Temple) में भगवान श्री कृष्ण की काले रंग की संगमरमर की मूर्ति है। इस मूर्ति को केवल एक ही पत्थर से बनाया गया है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपने एक हाथों पर उठाए दिखाई देते है और दूसरे हाथ से भक्तों को आशीर्वाद देते हुए नजर आते हैं। इस मंदिर के अंदर जाने के लिए तीन प्रवेश द्वार बनाए गए है। एक प्रवेश द्वार केवल महिलाओ के लिए बनाया गया है जिसे सूरजपोल कहते हैं।

अंधा हो गया था औरंगजेब
कहा जाता है कि मेवाड़ के राजा इस मंदिर में मौजूद मूर्तियों को गोवर्धन की पहाड़ियों से औरंगजेब से बचाकर लाए थे। ये मंदिर 12वीं शताब्दी में बनाया गया था। नाथद्वारा (Nathdwara) में मान्यता है कि जब औरंगजेब श्रीनाथ जी की मूर्ति को खंडित करने मंदिर में आया था तो मंदिर में पंहुचते ही अँधा हो गया था। तब उसने अपनी दाढ़ी से मंदिर की सीढियाँ साफ़ करते हुए श्रीनाथजी से विनती की और वह ठीक हो गया। उसके बाद औरंगजेब ने बेशकीमती हीरा मंदिर को भेंट किया जिसे हम आज श्रीनाथ जी के दाढ़ी में लगा देखते है।

8 बार होती है पूजा
नाथद्वारा में स्थित श्रीनाथ मंदिर में दिन में 8 बार पूजा की परंपरा है। भगवान श्रीनाथजी वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख देवता है और इस संप्रदाय को कुछ लोग पुष्टि मार्ग, वल्लभ संप्रदाय और शुद्धद्वैत नाम से भी जानते हैं। इस संप्रदाय की स्थापना वल्लभाचार्य ने की थी। भक्ति योग के अनुयायी और गुजरात, राजस्थान व महाराष्ट्र के वैष्णव प्रमुखता से श्रीनाथजी को मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं।

कैसे पहुंचें?
- श्रीनाथद्वारा के उत्तर, दक्षिण, पूर्व, प‍श्चिम में स्थित सभी प्रमुख शहरों से सीधी बस सेवा उपलबध है।
- श्रीनाथद्वारा के निकटवर्ती रेल्वे स्टेशन मावली (28) एवं उदयपुर (48) से देश के प्रमुख शहरों के लिए ट्रेन सेवा उपलब्ध है।
- श्री‍नाथद्वारा के निकटवर्ती हवाई अड्डे डबोक (48) से देश के प्रमुख शहरों के लिए वायुयान सेवा उपलब्ध है।

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