विवाहित महिला या दुर्घटना में मृत परिजन की मृत्यु तिथि पता न हो तो इस दिन करें श्राद्ध

Published : Sep 26, 2021, 12:03 PM IST
विवाहित महिला या दुर्घटना में मृत परिजन की मृत्यु तिथि पता न हो तो इस दिन करें श्राद्ध

सार

इन दिनों पितृ पक्ष (Shradh Paksha 2021) चल रहा है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि इन 16 दिनों में परिवार के मृत लोगों का श्राद्ध कर्म मृत्यु तिथि के आधार पर किया जाता है। लेकिन कई बार लोगों को अपने मृत परिजनों की मृत्यु तिथि याद नहीं रहती या और किसी कारण वे निश्चित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाते।

उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, वैसे तो श्राद्ध कर्म व्यक्ति की मृत्यु तिथि पर ही करना चाहिए, लेकिन किसी मृत परिजन की मृत्यु तिथि की जानकारी न हो तो हमें उनका श्राद्ध (Shraddha Paksha 2021) कब करना चाहिए, इस संबंध में कुछ खास तिथियां बताई गई हैं। ये तिथियां इस प्रकार हैं…

- सुहागिन महिला की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो उसका श्राद्ध पितृ पक्ष की नवमी तिथि ( इस बार 30 सितंबर, गुरुवार) पर करना चाहिए। इसी तिथि पर परिवार की अन्य मृत महिलाओं की आत्म शांति के लिए भी श्राद्ध कर्म (Shradh Paksha 2021) किया जा सकता है।
- जो लोग संन्यासी हो गए थे और उनकी मृत्यु हो गई, अगर उनकी मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है तो उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की एकादशी (इस बार 2 अक्टूबर, शनिवार) पर करना चाहिए।
- मृत बच्चों की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो उनका श्राद्ध पितृ पक्ष (Shradh Paksha 2021) की त्रयोदशी (इस बार 4 अक्टूबर, सोमवार) तिथि पर किया जाता है।
- किसी व्यक्ति की मृत्यु असमय हो गई है तो उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है। अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु शस्त्र से हुई हो या किसी ने आत्म हत्या की हो या जहर खाने की वजह से हुई हो या किसी दुर्घटना में हुई हो और उनकी मृत्यु तिथि मालूम न हो तो उनका श्राद्ध कर्म पितृ पक्ष (Shraddha Paksha 2021) की चतुर्दशी (इस बार 5 अक्टूबर, मंगलवार) तिथि पर करना चाहिए।
- पितृ पक्ष की अंतिम तिथि को सर्वपितृमोक्ष अमावस्या कहा जाता है। इस बार ये तिथि 6 अक्टूबर, बुधवार को है। इस तिथि पर उन सभी मृत लोगों का श्राद्ध कर्म किया जा सकता है, जिनका पितृ पक्ष (Shradh Paksha 2021) में श्राद्ध करना हम भूल गए हैं या जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है।

ऐसे कर सकते हैं श्राद्ध कर्म (Shradh Paksha 2021)
- स्नान के बाद कुतुप काल यानी दोपहर में करीब 12 बजे श्राद्ध कर्म करना चाहिए। श्राद्ध दक्षिण दिशा में मुंह रखकर करना चाहिए।
- जलते हुए कंडों के अंगारों पर गुड़-घी, खीर और भोजन अर्पित करें। हाथ में जल लें और उसमें जौ, काले तिल, चावल, गाय का दूध, सफेद फूल और जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों का ध्यान करते हुए अर्पित करें।
- जल तांबे के बर्तन में अर्पित करना चाहिए। इसके बाद गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए घर के बाहर भोजन रखें। जरूरतमंद लोगों को खाने का और धन का दान करें। ये श्राद्ध कर्म करने की सरल विधि है।

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