
बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण के तीन राज्यों (तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक) के दो दिन की यात्रा पर निकले हैं। आज उनकी यात्रा का दूसरा और आखिरी दिन है। शनिवार को उन्होंने तेलंगाना में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। इसके बाद तमिलनाडु पहुंचे थे।
रविवार सुबह प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के बांदीपुर और मधुमलाई टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी की। पीएम काली टोपी, खाकी पैंट, कैमोफ्लाज वाली टी-शर्ट और काले जूते पहने नजर आए। इसके बाद मैसूर में पीएम ने इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस (आईबीसीए) का शुभारंभ किया।
आईबीसीए से विश्व की सात बड़ी बिल्लियों की रक्षा करने पर फोकस किया जाएगा। इन बिल्लियों में बाघ, शेर, तेंदुआ, हीम तेंदुआ, पुमा, जगुआर और चीता शामिल हैं। इस दौरान उन्होंने बाघों की संख्या को लेकर लेटेस्ट डाटा जारी किया। इसके अनुसार भारत में 2022 तक बाघों की संख्या बढ़कर 3167 हो गई है। पीएम ने कहा कि बाघों की संख्या बढ़ना भारत के लिए गर्व की बात है। यह भारत के साथ ही पूरी दुनिया की सफलता है।
पीएम ने कहा कि प्रोजेक्ट टाइगर को 50 साल हो गए हैं। इसकी सफलता भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए गौरव का विषय है। भारत ने टाइगर को न सिर्फ बचाया है बल्कि उसे फलने-फूलने का बेहतर इकोसिस्टम दिया है। जिस समय हमने अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे किए हैं उसी समय दुनिया की करीब 75 फीसदी टाइगर पॉपुलेशन भारत में है। यह भी संयोग है कि भारत में टाइगर रिजर्व भी 75000 वर्ग किलोमीटर का है और बीते 10-12 वर्षों में बाघों की आबादी भी 75 फीसदी बढ़ी है। यह सभी के प्रयासों से संभव हो सका है।
बोम्मन और बेल्ली से मिले नरेंद्र मोदी
जंगल सफारी के दौरान उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों से बातचीत की। पीएम ने तमिलनाडु सीमा के पास तप्पकडु और मधुमलाई वन रेंज का भ्रमण किया। वह जीप की फ्रंट सीट पर सवार हुए और करीब 22 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सफारी की। जंगल सफारी के बाद पीएम मुदुमलाई टाइगर रिजर्व स्थित थेप्पाकडू एलीफेंट कैंप पहुंचे। उन्होंने हाथियों को गन्ना खिलाया और सूंड थपथपाकर उन्हें प्यार किया। इसके बाद पीएम हाथी के बच्चों के पास गए। उन्होंने सिर सहलाकर हाथी के बच्चों को दुराला। पीएम नरेंद्र मोदी ने बोम्मन और बेल्ली से मुलाकात की। इसके साथ ही बोम्मी और रघु नाम के हाथियों को भी दुलारा। ऑस्कर अवार्ड विजेता फिल्म ‘द एलिफेंट विस्परर्स' बोम्मन और बेल्ली की कहानी पर आधारित थी।
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1973 में हुई थी प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत
गौरतलब है कि बाघों के संरक्षण के लिए एक अप्रैल 1973 को प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत हुई थी। शुरू में प्रोजेक्ट टाइगर में 18,278 वर्ग किमी में फैले 9 टाइगर रिजर्व शामिल थे। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट में 75,000 वर्ग किमी (देश के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 2.4 प्रतिशत) से अधिक में फैले 53 टाइगर रिजर्व शामिल हैं। भारत में बाघों की संख्या 3167 हो गई है। यह पूरी दुनिया में बाघों की संख्या का 75 फीसदी है। भारत में छह फीसदी प्रति वर्ष की दर से बाघों की संख्या बढ़ रही है।
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