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बिहार में एक बार फिर एक्टिव हुए प्रशांत किशोर, कहा- 2012 से 6 बार हुआ प्रयोग, नतीजा जीरो

बिहार की पॉलिटिक्स पर राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले प्रशांत किशोर ने नितीश को फिर निशाने पर लेकर  वर्तमान सरकार पर जमकर निशाना साधा है। बता दे कि किशोर इस समय जन सुराज अभियान चला रहे है, और हो सकता है कि जल्द ही अपनी पार्टी की घोषणा कर दे।

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Patna, First Published Aug 18, 2022, 5:55 PM IST

पटना (बिहार). राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले प्रशांत किशोर बिहार में सत्ता बदलने के बाद काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं। बिहार की राजनीति बदलने के लिए वे जन सुराज अभियान चला रहे है। बीते दिनों समस्तीपुर में सरकार पर बरसते नजर आए। एक बार फिर प्रेस वार्ता में प्रशांत किशोर ने वर्तमान सरकार पर जमकर निशाना साधा। प्रशांत किशोर ने कहा कि बीते 10 साल में बिहार में छह बार प्रयोग किया गया। इनमें से पांच बार तो नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने। एक बार जीतन राम मांझी के सीएम बनाया गया वो भी नीतीश कुमार ने ही उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था। इन सभी प्रयोगों में दो बातें कॉन्सटेंट दिखती है। पहला नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बने रहना और दूसरा बिहार की बदहाली। दोनों चीजों में इन 10 सालों में कुछ भी बदलाव नहीं आया। 

बिहार के विकास के बारे में नहीं हो रही चर्चा
प्रशांत किशोर ने कहा बीते 10 सालों में चाहे किसी की भी सरकार रही हो सभी अपने-अपने हित में लगे हैं। बिहार के विकास के बारे में कोई भी चर्चा नहीं कर रहा है। 2012 में जब से एनडीए की सरकार चल रही थी उस समय जब नीतीश कुमार एनडीए से अलग हुए तो पहले अकेले सरकार चलाई फिर चुनाव हारने के बाद जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया। फिर आरजेडी के साथ महागठबंधन बना 2015 में चुनाव लड़े। उसके बाद 2017 में एनडीएम में वापस चले गए। फिर 2020 मे एनडीए के साथ चुनाव लड़ा उसके बाद 2022 में एनडीए से अलग होकर महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बना ली। 

नए महागठबंधन में सात दल शामिल हैं
प्रशांत किशोर ने कहा कि अभी जिस नए महागठबंधन मे नीतीश कुमार शामिल हुए हैं अौर सरकार बनाई है। वह एक नई गठबंधन है। इसमें सात दल शामिल है। इससे पहले के गठबंधन में लेफ्ट की पार्टियां शामिल नहीं थी। 2015 के मुकाबले इस नए गठबंधन में चार नई पार्टियां शामिल हैं। 

गठबंधन में जितने अधिक दल वो उतना ही अस्थिर 
प्रशांत किशोर ने कहा कि राजनीतिक एक्सपर्ट से लेकर सभी का मानना है कि गठबंधन में जितने अधिक दल शामिल होंगे। वो गठबंधन उतना ही कमजोर होता है। उसमें अस्थिरता होती है। सभी दलों को एक साथ मिलाकर सरकार चलाना उतना ही कठिन होता है। इस सरकार को भी सभी को साथ लेकर चलना मुश्किल होगा। अभी से ही सरकार के सामने परेशानी आने लगी है। कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने बिहार को लेकर कहा था कि कांग्रेस ठगा हुआ महसूस कर रही है। कांग्रेस के कम लोगों को सरकार में जगह मिली। अभी तो ये शुरूआत है। आने वाले समय में ये सरकार चलने वाली नहीं हैं।

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