8th Pay Commission Big Update: 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी यूनियनों ने CGEGIS बीमा कवर को ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ से ₹3 करोड़ तक करने की बड़ी मांग रखी है।
8th Pay Commission Latest News: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें सिर्फ सैलरी, पेंशन और भत्तों तक सीमित नहीं हैं। कर्मचारी संगठनों ने अब CGEGIS (Central Government Employees Group Insurance Scheme) में भी बड़े बदलाव की मांग उठाई है। इस मांग का सबसे बड़ा हिस्सा बीमा कवर से जुड़ा है। एक कर्मचारी संगठन के प्रस्ताव के मुताबिक, ग्रुप सी (Group C) कर्मचारियों का मौजूदा ₹1.5 लाख का बीमा कवर बढ़ाकर ₹1 करोड़ करने की मांग की गई है। वहीं, ग्रुप बी (Group B) के लिए ₹1.5 करोड़ और ग्रुप ए (Group A) के लिए ₹3 करोड़ तक का कवर प्रस्तावित किया गया है।
8वें वेतन आयोग में बीमा का मामला क्या है?
सरकारी कर्मचारियों के लिए एक खास ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम चलती है, जिसका नाम CGEGIS है। इसका काम कर्मचारी को जीवन बीमा (Insurance) और एक तय बचत (Savings) का डबल फायदा देना है। दिक्कत यह है कि इस स्कीम में मिलने वाले बीमा की रकम कई दशकों से लगभग वहीं की वहीं अटकी है। यूनियनों की दलील है कि आज के जमाने में डेढ़ लाख रुपए की वैल्यू न के बराबर है। अगर किसी कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इतनी कम रकम से उसके परिवार का गुजारा कैसे मुमकिन होगा?
यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने क्या प्रपोजल रखा?
8वें वेतन आयोग की तीन दिन की चंडीगढ़ कंसल्टेशन (Chandigarh consultation) आज 18 सितंबर को खत्म हो रही है। इन बैठकों में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के केंद्रीय कर्मचारियों, कर्मचारी संगठनों और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत की गई। बैठकों का कोई खास एजेंडा पहले से घोषित नहीं किया गया था। लेकिन पिछली बैठकों की तरह यहां भी फिटमेंट फैक्टर, पेंशन रिवीजन और भत्तों जैसे मुद्दे अहम रहे। इसी के साथ CGEGIS को बदलने की मांग भी कर्मचारियों के बीच लगातार चर्चा में है।
8th CPC: किसने की 3 करोड़ तक इंश्योरेंस की मांग
FNPO (Federation of National Postal Organisations) के मुताबिक, ग्रुप सी के लिए मौजूदा इंश्योरेंस कवर ₹1.5 लाख है। FNPO ने इससे काफी ज्यादा कवर का प्रस्ताव दिया है। संगठन ने सिर्फ बीमा कवर ही नहीं, मंथली कंट्रीब्यूशन में भी बदलाव का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक, ग्रुप सी ₹1 करोड़ कवर और मंथली कटौती ₹1,000, ग्रुप बी ₹1.5 करोड़ कवर और मंथली कटौती ₹1,500, ग्रुप ए ₹3 करोड़ कवर और मंथली कटौती ₹3,000 हो। FNPO ने एक दूसरा विकल्प भी रखा है। इसमें 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की ओर से सुझाए गए ₹15 लाख, ₹25 लाख और ₹50 लाख के स्लैब्स को आधार बनाकर उन्हें मौजूदा सैलरी लेवल के हिसाब से अपडेट करने की बात कही गई है।
दूसरे कर्मचारी संगठनों की क्या मांग है?
MSA (सर्वे ऑफ इंडिया)
सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) से जुड़े मिनिस्ट्रियल स्टॉफ एसोसिएशन ने इंश्योरेंस कवर को मौजूदा रेट्स से कम से कम 10 गुना बढ़ाने का सुझाव दिया है। संगठन का तर्क है कि महंगाई और रोजमर्रा के खर्च काफी बढ़ चुके हैं। ऐसे में कर्मचारियों और उनके परिवारों को ज्यादा फाइनेंशियल प्रोटेक्शन की जरूरत है।
NCJCM स्टाफ साइड
NCJCM स्टाफ साइड ने भी CGEGIS इंश्योरेंस कवर में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी की मांग की है। संगठन का कहना है कि स्कीम में ऐसा बदलाव होना चाहिए जो कर्मचारियों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखे।
रेलवे सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी
रेलवे सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी (Railway Senior Citizens' Welfare Society) ने भी CGEGIS बेनिफिट्स को मौजूदा आर्थिक जरूरतों के हिसाब से बढ़ाने की मांग रखी है। संगठन का कहना है कि लंबे समय तक योगदान करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाला फायदा भी समय के साथ बेहतर होना चाहिए।
DA 50% होने पर इंश्योरेंस कवर बढ़ाने का भी प्रस्ताव
FNPO के प्रस्ताव में एक और खास बात है। संगठन ने इंश्योरेंस और सेविंग्स के मौजूदा 3:7 रेशियो को बदलकर 70:30 करने का सुझाव दिया है। यानी ज्यादा हिस्सा इंश्योरेंस प्रोटेक्शन की तरफ रखने की बात कही गई है। इसके अलावा एक ऐसा सिस्टम बनाने का प्रस्ताव भी है, जिसमें महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) यानी DA 50% से ऊपर जाते ही इंश्योरेंस कवर अपने आप 25% बढ़ जाए। अगर ऐसा सिस्टम लागू होता है तो महंगाई और DA में बढ़ोतरी के साथ इंश्योरेंस प्रोटेक्शन भी बढ़ती रहेगी।


