Jio IPO में देरी! क्या मुकेश अंबानी का प्लान डिले होगा? जानें लेटेस्ट अपडेट
Jio Platforms IPO Delay Reasons: भारत की सबसे बड़ी डिजिटल कंपनियों में से एक जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO का इंतजार बढ़ सकता है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मेगा-लिस्टिंग H1 2026 डेडलाइन पर पूरी हो पाएगी या नहीं, यह कंफर्म नहीं है। जानिए देरी की वजहें

Jio IPO में देरी की वजह क्या है?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, IPO में देरी का मुख्य कारण सरकार की ओर से नए लिस्टिंग नियमों का औपचारिक नोटिफिकेशन नहीं होना है। SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने नियमों को मंजूरी दे दी है। लेकिन कंपनी को नई नियमावली के तहत IPO फाइल करने के लिए सरकारी नोटिफिकेशन का इंतजार करना पड़ रहा है। इस वजह से रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने अभी तक इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की नियुक्ति और DRHP (Draft Red Herring Prospectus) दाखिल नहीं किया है।
Jio IPO DRHP फाइलिंग
IPO के लिए सबसे अहम स्टेप है DRHP फाइल करना, जो कंपनी और शेयर बिक्री की डिटेल जानकारी देता है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, Jio इस समय सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रही है। नोटिफिकेशन मिलने के बाद ही बैंकर्स नियुक्त किए जाएंगे और IPO पेपर्स फाइल होंगे। फिलहाल कंपनी का लक्ष्य है कि DRHP अप्रैल 2026 तक फाइल किया जाए, बशर्ते नियमों की अंतिम घोषणा पहले हो।
Jio IPO क्यों है खास?
जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO भारतीय कैपिटल मार्केट में सबसे ज्यादा वॉच लिस्टिंग में से एक है। भारत का सबसे बड़ा वायरलेस नेटवर्क संचालित करती है। डिजिटल सर्विसेज, एंटरटेनमेंट और टेक प्लेटफॉर्म्स में विस्तार है। निवेशकों के लिए यह IPO लंबी अवधि का बड़ा अवसर हो सकता है।
मुकेश अंबानी का पुराना टाइमलाइन
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने अगस्त 2025 में 48वें AGM में शेयरहोल्डर्स को IPO की तैयारी के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, 'हम सभी तैयारियां कर रहे हैं ताकि Jio का IPO फाइल किया जा सके।' सभी जरूरी अप्रूवल्स के बाद उनका लक्ष्य H1 2026 में लिस्टिंग का था।
नियमों में बदलाव और आईपीओ को लेकर देरी
देरी का कारण बड़े IPOs के लिए प्रस्तावित सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग नियमों में बदलाव है। सरकारी नोटिफिकेशन अभी लंबित है, जिससे बड़ी कंपनियों की लिस्टिंग का समय अनिश्चित हो गया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, देरी Jio के लिए विशेष नहीं है, लेकिन नियामक प्रक्रिया ने तैयारी धीमी कर दी है।
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