मस्त बनारसी पान: आखिर कैसे एक छोटी पान की दुकान बना भारत का बड़ा मॉडर्न पान ब्रांड? मस्त बनारसी पान ने पान की इमेज को कैसे पूरी तरह बदल दिया? क्यों युवा ग्राहकों के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहा है यह पान ब्रांड?
Mast Banarasi Paan Sucess Story: पान हमारे देश में पूजा-पाठ, त्योहार, शादी-ब्याह और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है। लेकिन लंबे समय तक पान की दुकानें बस छोटी-मोटी गुमटियां ही हुआ करती थीं, जहां साफ-सफाई या आज के ग्राहकों के अनुभव पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था। बस यहीं पर 'मस्त बनारसी पान' ने कहानी को बदलने का फैसला किया। साल 2016 में शुरू हुई इस कंपनी का हेडक्वार्टर नोएडा में है। इसने पान को सिर्फ खाना खाने के बाद खाए जाने वाले स्नैक से निकालकर एक मॉडर्न, कैफे-स्टाइल डेजर्ट में बदल दिया। आज यह ब्रांड भारत के 20 राज्यों के 320 से ज्यादा शहरों में हर दिन लगभग एक लाख पान बेचता है।

कौन हैं इसके फाउंडर और क्या है कंपनी की कहानी?
कंपनी के फाउंडर और सीईओ पी. एन. ठाकुर ने एक ऐसे बाजार में मौका देखा, जिसे ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर रहे थे। ठाकुर ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग और इंटरनेशनल बिजनेस में MBA किया है और अपना करियर हिंदुस्तान टाइम्स से शुरू किया था। ब्रांडिंग और ग्राहकों के व्यवहार की उनकी समझ ने बाद में कंपनी की पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाई।
कंपनी की कहानी के मुताबिक, यह आइडिया पूरे भारत में पान की दुकानों को देखकर आया। उन्होंने देखा कि यह इंडस्ट्री सालों से वैसी की वैसी ही है, इसमें कोई बदलाव नहीं आया। पान को लेकर बनी गलत धारणाओं, पुराने तरीके से पेश करने और साफ-सफाई की कमी के कारण इसकी पहुंच सीमित थी। 2016 में कंपनी शुरू करने से पहले ठाकुर ने लगभग तीन साल तक रिसर्च और डेवलपमेंट पर काम किया। उनका मकसद साफ था: पान के पारंपरिक स्वाद को बनाए रखते हुए इसे ज्यादा साफ-सुथरा, फैमिली-फ्रेंडली और आज के जमाने का बनाना।
क्या चीज इसे अलग बनाती है?
कंपनी का सबसे बड़ा फैसला था 100% तंबाकू-फ्री पान बेचना। इस एक कदम ने कई ग्राहकों के लिए पान की पूरी इमेज ही बदल दी। अब यह तंबाकू से जुड़ी चीज न होकर एक डेजर्ट जैसा लगने लगा। पारंपरिक पान की दुकानों के उलट, मस्त बनारसी पान ने एक व्यवस्थित कैफे-स्टाइल सेटअप पेश किया, जहां हर उम्र के लोग एक साफ-सुथरे माहौल में पान का मजा ले सकते थे।
इसके अलावा, कंपनी ने अपने मेन्यू को भी बढ़ाया। यहां आम ग्राहकों के लिए ₹30 से लेकर ₹100 तक के पान मिलते हैं, वहीं शादियों और खास मौकों के लिए ₹2,100 तक के पान भी उपलब्ध हैं। इसके प्रोडक्ट्स जल्द ही उन युवा ग्राहकों के बीच पॉपुलर हो गए जो खाने-पीने के नए अनुभव तलाशते हैं।
समय के साथ, ब्रांड ने फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए तेजी से अपना विस्तार किया। आज देश भर में इसके 400 से ज्यादा आउटलेट हैं। इसके अलावा, कंपनी ने Swiggy और Zomato जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के साथ पार्टनरशिप करके शहरी बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई। रिटेल स्टोर्स के अलावा, कंपनी प्राइवेट और कॉरपोरेट इवेंट्स के लिए भी सर्विस देती है, जिससे इसका कस्टमर बेस और भी बढ़ रहा है।
ठाकुर के नेतृत्व में, मस्त बनारसी पान एक छोटी पान कंपनी से एक बड़े, संगठित रिटेल ब्रांड में बदल गया है, जो पारंपरिक भारतीय स्वाद को मॉडर्न ब्रांडिंग और ग्राहक सेवा के साथ जोड़ता है।
