जेरोधा के CEO नितिन कामथ के अनुसार, 3 अगस्त से F&O शेयरों के लिए लागू हो रहा नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) ब्रोकरेज फर्म की कमाई में 1-5% की कमी ला सकता है। इससे बाजार बंद होने का समय भी अलग-अलग होगा, जिससे शुरुआती भ्रम की स्थिति बन सकती है।

जेरोधा के संस्थापक और सीईओ नितिन कामथ ने कहा है कि नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) मैकेनिज्म ब्रोकरेज फर्म के राजस्व में लगभग 1-5 प्रतिशत की कमी ला सकता है। साथ ही, यह एक ऑपरेशनल चुनौती भी पैदा करेगा क्योंकि बाजार के विभिन्न सेगमेंट अब अलग-अलग समय पर बंद होंगे।

भारतीय स्टॉक एक्सचेंज 3 अगस्त से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट वाले शेयरों के लिए एक नया CAS मैकेनिज्म शुरू करेंगे। यह क्लोजिंग प्राइस तय करने के मौजूदा तंत्र की जगह लेगा। इसका उद्देश्य प्राइस डिस्कवरी में सुधार करना और दिन के अंत में होने वाली प्राइस मैनिपुलेशन को और मुश्किल बनाना है।

क्या है नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन?

कामथ के अनुसार, वर्तमान में किसी स्टॉक का क्लोजिंग प्राइस ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट के दौरान हुए ट्रेड के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर कैलकुलेट किया जाता है। नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के तहत, खरीद और बिक्री के ऑर्डर एकत्र किए जाएंगे और उन्हें एक ही संतुलन मूल्य (equilibrium price) पर मैच किया जाएगा।

मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा, "सोमवार, 3 अगस्त से चीजें थोड़ी और जटिल हो जाएंगी। एक्सचेंज F&O कॉन्ट्रैक्ट वाले शेयरों के लिए एक क्लोजिंग ऑक्शन सेशन, या CAS, शुरू कर रहे हैं।"

क्यों लाया जा रहा है नया नियम?

उन्होंने कहा कि नया फ्रेमवर्क दो प्रमुख मुद्दों को हल करने के लिए बनाया गया है। पहला, बाजार सूचकांकों को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड अक्सर बेंचमार्क क्लोजिंग प्राइस से मेल खाने के लिए बाजार बंद होने के करीब बड़े ऑर्डर देते हैं, जिससे स्टॉक की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है और ट्रैकिंग एरर बढ़ सकता है। दूसरा, ट्रेडिंग के आखिरी कुछ मिनटों में किए गए बड़े ट्रेड का क्लोजिंग प्राइस और बेंचमार्क सूचकांकों पर अनुपातहीन प्रभाव पड़ सकता है।

कामथ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "चूंकि CAS सभी ऑर्डरों को एक साथ पूल करता है और उन्हें एक ही कीमत पर मैच करता है, इसलिए क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करना और मुश्किल हो जाएगा।"

बाजार बंद होने के समय में होगा बदलाव

इस बदलाव के परिणामस्वरूप एसेट क्लास के आधार पर बाजार बंद होने का समय भी अलग-अलग होगा। F&O कॉन्ट्रैक्ट वाले शेयरों में दोपहर 3:15 बजे निरंतर ट्रेडिंग बंद हो जाएगी और वे क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में चले जाएंगे, जबकि अन्य सभी शेयरों में दोपहर 3:30 बजे तक ट्रेडिंग जारी रहेगी। इंडेक्स और स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट में दोपहर 3:40 बजे तक कारोबार होगा।

कामथ ने कहा कि अलग-अलग क्लोजिंग टाइमिंग से शुरुआत में निवेशकों के बीच भ्रम पैदा होने और ब्रोकरेज के लिए ग्राहकों की पूछताछ बढ़ने की संभावना है।

राजस्व में 5% तक की कमी का अनुमान

उन्होंने कहा, "अब जब ब्रोकिंग लिस्टेड है और लोग इस बिजनेस को और करीब से देख रहे हैं, तो ईमानदारी की बात यह है: यह शायद कुछ राजस्व कम कर देगा, संभवतः ब्रोकरेज आय का लगभग 1-5 प्रतिशत।"

उन्होंने कहा कि हालांकि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन भारतीय बाजारों के लिए नया है, लेकिन न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) और लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) सहित दुनिया के प्रमुख एक्सचेंजों द्वारा क्लोजिंग प्राइस निर्धारित करने के लिए इसी तरह के तंत्र का पहले से ही उपयोग किया जा रहा है। (एएनआई)

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