वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक, देश के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) ने वित्त वर्ष 2026 में 10,177 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे ज्यादा नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इस दौरान बैंकों के प्रमुख वित्तीय संकेतकों में लगातार सुधार देखा गया है।

नई दिल्ली [भारत], 28 जुलाई (एएनआई): वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, भारत के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने वित्त वर्ष 26 में 10,177 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया है। विज्ञप्ति के अनुसार, आरआरबी ने सीआरएआर, जमा, एनपीए और क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात सहित प्रमुख वित्तीय संकेतकों में लगातार सुधार दिखाया है।

RRB की वित्तीय सेहत में सुधार

विज्ञप्ति में कहा गया है, "हाल के वर्षों में आरआरबी की वित्तीय सेहत में सुधार हुआ है। आरआरबी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 10,177 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया है।"

जमा और लोन में बढ़ोतरी

कुल जमा राशि वित्त वर्ष 24 के 6,59,815 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 7,68,621 करोड़ रुपये हो गई, जबकि बकाया लोन इसी अवधि के दौरान 4,71,384 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,78,349 करोड़ रुपये हो गए हैं।

क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात भी वित्त वर्ष 24 के 71.4 प्रतिशत से सुधरकर वित्त वर्ष 26 में 75.2 प्रतिशत हो गया। क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात वित्त वर्ष 24 में 71.4 प्रतिशत से सुधरकर वित्त वर्ष 25 में 73.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 26 में 75.2 प्रतिशत हो गया।

एसेट क्वालिटी में भी सुधार

एसेट क्वालिटी में भी सुधार दिखा, जिसमें ग्रॉस एनपीए वित्त वर्ष 24 के 6.1 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 25 में 5.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 26 में 5.3 प्रतिशत हो गया। नेट एनपीए वित्त वर्ष 24 में 2.4 प्रतिशत, वित्त वर्ष 25 में 2.0 प्रतिशत और वित्त वर्ष 26 में 2.1 प्रतिशत रहा।

वित्तीय स्थिति हुई मजबूत

आरआरबी ने अपनी वित्तीय स्थिति को भी मजबूत किया है, जिसमें नेट वर्थ वित्त वर्ष 24 के 56,780 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 63,927 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 26 में 74,086 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेशियो (सीआरएआर) 14.2 प्रतिशत से सुधरकर 14.4 प्रतिशत और 15.0 प्रतिशत हो गया।

वित्तीय समावेशन पर सरकार की नजर

सरकार ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन के विस्तार में आरआरबी की प्रगति की निगरानी करती है। विज्ञप्ति में कहा गया है, "प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई) जैसी विभिन्न वित्तीय समावेशन योजनाओं के लक्ष्य डीएफएस द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और समय-समय पर उनकी निगरानी की जाती है।" (एएनआई)

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