चित्तम सुधीर ने अच्छी नौकरी छोड़कर हेल्दी मिलेट इडली बेचने का काम शुरू किया और आज लाखों कमा रहे हैं। विशाखापत्तनम में उनकी 'वासाना पोलि' स्टॉल काफी फेमस है।

बिजनेस में सक्सेस मिलना सोशल मीडिया पर ट्रोल होने जैसा आसान नहीं होता। लगातार मेहनत करनी पड़ती है। शुरुआत से ही क्वालिटी मेंटेन करनी होती है। बिजनेस शुरू करते ही पहले दिन मुनाफा हो, ऐसा मुमकिन नहीं। आजकल स्ट्रीट फूड वेंडर्स काफी फेमस हो रहे हैं। उनकी कमाई की खबरें रोज आती हैं। लोग हेल्दी खाने को तरजीह दे रहे हैं, इसलिए स्ट्रीट फूड में हेल्दी खाना बेचने वालों की कमाई बढ़ गई है। लेकिन चित्तम सुधीर (Chittam Sudhir) कोई नए नहीं हैं। 2018 में ही उन्होंने लोगों की सेहत और अपने बिजनेस के बारे में स्मार्ट तरीके से सोचा था। उनका आइडिया अब काम कर रहा है। चित्तम सुधीर हेल्दी इडली बेचकर लाखों कमा रहे हैं।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

हाई एजुकेशन वाले चित्तम सुधीर लाखों की सैलरी वाली जॉब कर सकते थे। 9 से 6 की नौकरी करके आराम से रह सकते थे। लेकिन चित्तम सुधीर की सोच अलग थी। शहर के लोगों को हेल्दी मिलेट इडली (Millet Idli) खिलाने का काम शुरू किया और सक्सेसफुल हुए। युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए। 50 हजार से शुरू की गई उनकी दुकान के आगे अब लोगों की लाइन लगती है। महीने के 7.5 लाख (सालाना लगभग 90 लाख) से ज्यादा कमाने वाले चित्तम सुधीर के बारे में जानकारी यहां है।

चित्तम सुधीर, आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के रहने वाले हैं। एग्रीकल्चर में एमए इकोनॉमिक्स की पढ़ाई करने वाले चित्तम सुधीर ने अच्छी नौकरी छोड़कर 2018 में ही मिलेट इडली बेचने का काम शुरू किया। विशाखापत्तनम के एमवीपी कॉलोनी में वो "वासाना पोलि" स्टॉल चलाते हैं। कम दाम में हेल्दी मिलेट इडली खिलाते हैं। खास पत्तों में लपेटकर स्टीम करते हैं। वो पत्ते भी काफी खास होते हैं। एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर। रोज सुबह 6.30 बजे से दुकान पर ग्राहकों की भीड़ लग जाती है। ये इडली आठ तरह के मिलेट से बनती है। लोग नारियल, अदरक और गाजर जैसी सब्जियों से बनी चटनी के साथ इडली खाते हैं। 

सिर्फ 50 हजार से चित्तम सुधीर ने ये स्टॉल शुरू किया था। अब वो श्रीकाकुलम, विजयनगरम और विशाखापत्तनम के आदिवासी किसानों से हर महीने करीब 700 किलो मिलेट खरीदते हैं। मार्केट रेट से ज्यादा दाम देकर खरीदते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक मदद मिलती है। 

चित्तम सुधीर को शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिवार वालों ने भी सपोर्ट नहीं किया। शुरुआत में चिंता जताई थी। लेकिन सुधीर रुके नहीं। अपना काम करते रहे। उनकी मेहनत रंग लाई। उनकी "वासाना पोलि" दुकान आज फेमस है। पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का भी ध्यान चित्तम सुधीर ने खींचा है।