रघुराम राजन ने AI से नौकरियों पर खतरे का समाधान सुझाया है। उन्होंने कंपनियों के AI टोकन पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, कर्मचारियों को री-ट्रेन करने वाली कंपनियों को टैक्स छूट देने की भी सलाह दी है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज रफ्तार तरक्की से इंसानी नौकरियों पर जो खतरा मंडरा रहा है, उससे निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और जाने-माने अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने एक बड़ा आइडिया दिया है। उनका कहना है कि कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 'AI टोकन' (AI Computational Tokens) पर टैक्स लगाया जाना चाहिए। अपने एक कॉलम 'प्रोजेक्ट सिंडिकेट' में उन्होंने मौजूदा सिस्टम की एक बड़ी खामी की ओर इशारा किया है। कंपनियां जब किसी इंसान को नौकरी पर रखती हैं, तो उन्हें सोशल सिक्योरिटी और दूसरे फायदे देने पड़ते हैं। लेकिन जब वही काम AI सिस्टम से कराया जाता है, तो ऐसी कोई सामाजिक या आर्थिक जिम्मेदारी नहीं होती। इसी वजह से कंपनियां मशीनों को अपनाने के लिए ज्यादा आकर्षित हो रही हैं।
AI का डर और असलियत
राजन का मानना है कि AI टेक्नोलॉजी आने से नौकरियां तो जाएंगी, लेकिन फिलहाल कॉर्पोरेट जगत में इसे अपनाने की रफ्तार उम्मीद से काफी धीमी है। अमेरिका के एक सेंसस सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 20 से ज्यादा कर्मचारियों वाली सिर्फ 20% कंपनियां ही फिलहाल AI का इस्तेमाल कर रही हैं। वहीं, 250 से ज्यादा कर्मचारियों वाली बड़ी कंपनियों में यह आंकड़ा 37% है। कई कंपनियां अभी भी एक्सपेरिमेंट ही कर रही हैं क्योंकि AI को मौजूदा सिस्टम में फिट करना मुश्किल और खर्चीला है। इसलिए यह बदलाव एकदम से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे होगा।
क्या है टैक्स का फॉर्मूला और समाधान?
रघुराम राजन ने इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ तरीके सुझाए हैं, ताकि टेक्नोलॉजी की तरक्की भी न रुके और नौकरियां भी बची रहें।
AI टोकन पर टैक्स
कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले AI टोकन पर शुरुआत में एक मामूली टैक्स लगाया जाए। बाद में, जैसे-जैसे नौकरियों के जाने का पैटर्न साफ होगा, इस टैक्स को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
कर्मचारियों की री-ट्रेनिंग पर छूट
जो कंपनियां अपने स्टाफ को लगातार नई चीजें सिखाकर (अप-स्किलिंग) नौकरी पर बनाए रखती हैं, उन्हें सरकार को 'टैक्स क्रेडिट' (टैक्स में छूट) देना चाहिए। यह छूट इस बात पर निर्भर करेगी कि ट्रेनिंग के बाद कर्मचारी कंपनी में कितने समय तक टिकता है।
सिर्फ खतरा नहीं, नए मौके भी देगा AI
राजन का यह भी मानना है कि AI टेक्नोलॉजी सिर्फ नौकरियां खत्म नहीं करेगी, बल्कि यह कमाई के नए रास्ते भी खोलेगी।
बढ़ेगी प्रोडक्टिविटी
'जेवन्स पैराडॉक्स' (Jevons Paradox) के मुताबिक, जब टेक्नोलॉजी से काम आसान और सस्ता होता है, तो चीजों की मांग बढ़ती है, जिससे बिक्री और रोजगार के मौके भी बढ़ते हैं।
मीडियम-स्किल्ड कर्मचारियों को मिलेगी ताकत
AI की मदद से मीडियम-स्किल्ड कर्मचारी भी मुश्किल काम कर पाएंगे। जैसे मेडिकल फील्ड में नर्सें AI की मदद से गंभीर बीमारियों का शुरुआती पता लगा सकेंगी।
नया बिजनेस शुरू करना होगा आसान
AI की वजह से वेब प्रोग्रामिंग और अकाउंटिंग जैसे काम आसान हो जाएंगे। इससे नए स्टार्टअप शुरू करने का शुरुआती खर्च भी कम होगा। आखिर में राजन कहते हैं कि इस तकनीकी बदलाव के दौर में कंपनियों को अपने कर्मचारियों के भविष्य की जिम्मेदारी लेनी होगी। जो कंपनियां इंसानी मेहनत की इज्जत करेंगी और अपने कर्मचारियों का साथ देंगी, भविष्य में सबसे अच्छा टैलेंट उन्हीं के पास आएगा।
