बेंगलुरु में ऑटो चालक पिता और फूल विक्रेता माँ की बेटी नागिनी एल. ने गरीबी से लड़कर कर्नाटक में सिविल जज का पद हासिल किया। उनकी यह प्रेरक सफलता दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत की मिसाल है।

बेंगलुरु: एक कहावत है कि अगर इरादे पक्के हों, तो गरीबी कभी कामयाबी के आड़े नहीं आती। बेंगलुरु के आनेकल तालुका की एक बेटी ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। दिन-रात ऑटो चलाकर बेटी को पढ़ाने वाले पिता और बाजार में फूल बेचकर बेटी के सपनों को सींचने वाली मां की मेहनत आज रंग लाई है। उनकी लाडली बेटी नागिनी एल. अब कर्नाटक में सिविल जज बन गई हैं, जिससे पूरा राज्य उन पर गर्व कर रहा है।

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तिरुपाल्या गांव का 'कोहिनूर' हैं नागिनी

बेंगलुरु के बाहरी इलाके आनेकल के एक छोटे से गांव तिरुपाल्या की रहने वाली नागिनी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। उनके पिता लक्ष्मण दिन भर ऑटो चलाकर परिवार का पेट पालते हैं, तो वहीं मां मंजुला बाजार में फूल बेचकर घर चलाने में मदद करती हैं। बचपन में नागिनी भी अपनी मां के साथ फूल बेचने में मदद करती थीं। ऐसी मुश्किल आर्थिक हालात के बावजूद, नागिनी के माता-पिता ने उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने अपनी तंगी भरी जिंदगी के बीच बेटी की पढ़ाई का सपना देखा था।

फूल बेचते-बेचते की पढ़ाई

नागिनी की इस सफलता के पीछे एक लंबा संघर्ष है। बचपन से ही वह अपनी मां के साथ फूलों के कारोबार में हाथ बंटाती थीं। वह एक हाथ से फूल की माला बनातीं तो दूसरे हाथ में किताब पकड़कर पढ़ाई करती थीं। उनकी एक और खास बात यह है कि उन्होंने पहली से 10वीं क्लास तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में कन्नड़ मीडियम से की है। नागिनी ने यह साबित कर दिया है कि गरीबी सिर्फ एक आर्थिक स्थिति है, इसका दिमाग की काबिलियत से कोई लेना-देना नहीं है।

मेहनत लाई रंग

वकालत की प्रैक्टिस शुरू करने के बाद भी नागिनी अपना लक्ष्य नहीं भूलीं। जज बनने की अपनी धुन में वह दिन-रात मेहनत करती रहीं। बेटी की इस जीत पर मां मंजुला ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'सुबह मेरी बेटी मेरे बनाए हुए फूलों के हार बेचकर स्कूल जाती थी। आज वह जज बन गई है, जिससे हमें बहुत ज्यादा खुशी है।' पिता लक्ष्मण भी बेटी की इस कामयाबी पर भावुक हो गए। उन्होंने कहा, 'मैं रोज अपनी बेटी को ऑटो से कॉलेज छोड़ने जाता था। हमारी बेटी ने हमारी मुश्किलों को समझा और आज पूरे गांव का नाम रोशन किया है। मेरी यही दुआ है कि वह इंसाफ की कुर्सी पर बैठकर जरूरतमंदों की आवाज बने।'

युवाओं के लिए बनीं मिसाल

आज के दौर में जहां युवा छोटी-छोटी मुश्किलों से घबराकर रास्ता भटक जाते हैं, उनके लिए नागिनी एक बहुत बड़ी प्रेरणा हैं। सरकारी स्कूल में पढ़कर, माता-पिता के काम में हाथ बंटाकर और गरीबी की आग में तपकर कमल की तरह खिलने वाली नागिनी की यह सफलता करोड़ों स्टूडेंट्स के लिए एक मिसाल है।