परीक्षा में पूछे गए इस प्रश्न पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है। कई नेताओं ने भी इसको लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस प्रश्न को देशद्रोह की श्रेणी में बताया जा रहा है। मांग उठ रही है कि प्रश्नपत्र सेट करने वालों और आयोग पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

करियर डेस्क : रविवार को हुई मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा एक बार फिर विवादों में घिर गई है। राज्य सेवा एवं वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कश्मीर को लेकर विवादित सवाल किया गया, जिस पर बवाल मच गया है। आयोग का पेपर सेट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। हुआ यूं कि MPPSC की प्रारंभिक परीक्षा के दूसरे पेपर में कश्मीर को लेकर विवादित प्रश्न पूछा गया। प्रश्न था कि, क्या भारत को कश्मीर को पाकिस्तान को दे देने का निर्णय कर लेना चाहिए? इसी सवाल को लेकर बखेड़ा खड़ा हो गया है।

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तर्क के साथ पूछा गया सवाल
प्रारंभिक परीक्षा के दूसरे पेपर के प्रश्न संख्या 48 में पूछा गया कि क्या भारत को कश्मीर पाकिस्तान को देने का फैसला करना चाहिए? और छात्रों को प्रश्न के साथ चुनने के लिए दो तर्क भी दिए।
तर्क 1. हां, इससे भारत का धन बचेगा।
तर्क 2. नहीं, इस तरह के निर्णय से समान मांगों में और वृद्धि होगी।

उत्तर- A- तर्क 1 मजबूत है।
B- तर्क 2 मजबूत है।
C- तर्क 1 और तर्क 2 दोनों मजबूत हैं।
D- तर्क 1 और 2 दोनों ही मजबूत नहीं हैं।

बवाल मचा तो एक्शन
जैसे ही यह सवाल बाहर आया इस पर बवाल मच गया। जब विवाद बढ़ा तो आनन-फानन में लोक सेवा आयोग ने प्रश्नपत्र सेट करने वाले को नोटिस भेजा और MPPSC के सभी काम करने पर रोक लगा दी है। आयोग की तरफ से भेजे गए नोटिस में लिखा गया है कि इस प्रश्न के अवलोकन के बाद संज्ञान में आया है कि प्रश्न विवादास्पद है। यह भी पाया गया है कि प्रश्न तैयार करने के दौरान दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। यह कदाचरण की श्रेणी में आता है। इसलिए आयोग आपको भविष्य में आयोग के किसी भी तरह के काम से डिवार करता है।

गृहमंत्री ने कह दी यह बात
वहीं, जब गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) से इसको लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि MPPSC की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 में उम्मीदवारों से इस तरह का सवाल पूछना गलत है, ये आपत्तिजनक है। यह प्रश्न पत्र जिन दो लोगो ने बनाया है, उन्हें आयोग की तरफ से नोटिस जारी किया गया है। उन दोनों को देशभर में आयोग का काम करने से रोक दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को भी एक्शन लेने का निर्देश दिया गया है।

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