H-1B Visa Fee 2025: ट्रंप प्रशासन की ओर से H-1B वीजा पर लगाए गए करीब 90 लाख रुपए की भारी फीस को लेकर राहत की खबर सामने आई है। USCIS की नई गाइडलाइन के मुताबिक, पुराने वीजा होल्डर्स और F-1 स्टूडेंट्स को अब यह फीस नहीं देनी होगी। जानिए डिटेल्स।

H-1B Visa Fee Relief: अमेरिका में काम कर रहे और पढ़ाई पूरी कर चुके हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। ट्रंप प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जो इंटरनेशनल ग्रेजुएट्स पहले से अमेरिका में मौजूद हैं और H-1B वीजा के लिए स्पॉन्सर किए गए हैं, उन्हें हाल ही में लागू किया गया $100,000 (करीब 90 लाख रुपए) का भारी शुल्क नहीं देना होगा। इससे पहले यह नियम लागू होने के बाद इंडियन प्रोफेशनल्स और अमेरिकी कंपनियों के बीच काफी भ्रम की स्थिति थी। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अब USCIS (US Citizenship and Immigration Services) की नई गाइडलाइंस के बाद तस्वीर साफ हो गई है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

USCIS ने क्या कहा?

USCIS ने अपने बयान में कहा कि यह नया शुल्क उन लोगों पर लागू नहीं होगा जो पहले से अमेरिका में किसी वैध वीजा पर मौजूद हैं, जैसे-

  • F-1 स्टूडेंट वीजा।
  • L-1 इंटर-कंपनी ट्रांसफर वीजा।
  • या मौजूदा H-1B वीजा होल्डर्स जो सिर्फ रिन्यू या एक्सटेंशन करवा रहे हैं।
  • एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियम 21 सितंबर 2025 से पहले जारी या सबमिट की गई किसी भी H-1B वीजा पिटीशन पर लागू नहीं होगा।
  • साथ ही, मौजूदा H-1B वीजा होल्डर पहले की तरह अमेरिका से बाहर यात्रा कर सकेंगे और लौट सकेंगे। बता दें कि हाल ही में H-1B वीजा नियमों ने कई भारतीय प्रोफेशनल्स को चिंतित कर दिया था।

H-1B वीजा पर छात्रों को भी मिली बड़ी राहत

USCIS ने यह भी साफ किया कि जो छात्र F-1 वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं और अब H-1B जॉब में ट्रांजिशन कर रहे हैं, उन्हें भी यह भारी शुल्क नहीं देना होगा।

ये भी पढ़ें- H-1B वीजा नियम सख्त करने की तैयारी, अब भारत में शिफ्ट होंगी अमेरिकी कंपनियां?

H-1B वीजा को लेकर भारतीयों को क्यों थी चिंता?

अमेरिका के H-1B वीजा प्रोग्राम में भारतीयों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। वर्तमान में लगभग 3 लाख भारतीय प्रोफेशनल्स अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे हैं। हर साल 70% नए H-1B वीजा भारतीयों को ही मिलते हैं। यह वीजा अमेरिकी कंपनियों को विदेशों से टेक्निकल और हाई स्किल वाले कर्मचारी लाने की अनुमति देता है। आमतौर पर वीजा आवेदन की लागत $215 से $5,000 तक होती थी, लेकिन $100,000 की नई फीस ने इसे 20 से 100 गुना तक बढ़ा दिया था। एक्सपर्ट का कहना था कि यह नई फीस H-1B वीजा प्रोग्राम को खत्म करने जैसा कदम होता, क्योंकि इतने ऊंचे शुल्क के कारण स्टार्टअप्स और मिड-साइज कंपनियों के लिए विदेशी टैलेंट हायर करना लगभग असंभव हो जाता।

H-1B वीजा के जरिए अबतक हजारों भारतीय परिवार अमेरिकी में सेटल हुए

H-1B वीजा भारतीय परिवारों के लिए अमेरिकी सपने की पहली सीढ़ी रहा है। इसी वीजा के जरिए हजारों भारतीय परिवार अमेरिका में सेटल हुए हैं। The Other One Percent नाम के रिसर्च के अनुसार भारतीय-अमेरिकन समुदाय आज अमेरिका का सबसे शिक्षित और हाई इनकम वाला समुदाय है। करीब 3 मिलियन भारतीय-अमेरिकी आबादी में से लगभग एक चौथाई लोग सीधे या परोक्ष रूप से H-1B प्रोग्राम से जुड़े हैं। इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो जैसी भारतीय कंपनियां लंबे समय से H-1B वीजा के जरिए अपने इंजीनियरों को अमेरिकी प्रोजेक्ट्स पर भेजती रही हैं। वहीं गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन जैसी अमेरिकी कंपनियां भी भारतीय टैलेंट पर काफी निर्भर हैं।

ये भी पढ़ें- अमेरिकी शिक्षा की चमक फीकी? भारतीय छात्रों की संख्या में 44% की चौंकाने वाली गिरावट