Savitribai Phule Jayanti Speech in Hindi: 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले जयंती पर छात्र छोटे और लंबे भाषण दे सकते हैं। वे भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने लड़कियों के स्कूल खोले और समाज सुधार किया। देखें सावित्रीबाई फूले जयंती भाषण पर भाषण।

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?
​सशक्तिकरण की मिसाल
सावित्रीबाई फुले जब स्कूल जातीं, तो लोगों द्वारा पत्थर और कीचड़ फेंके जाते थे, फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लड़कियों को पढ़ाना जारी रखा।

Savitribai Phule Jayanti Bhashan In Hindi: आज हम एक ऐसी महान महिला सावित्रीबाई फुले की जयंती मना रहे हैं, जिन्होंने शिक्षा और साहस से समाज में बदलाव लाया। सावित्रीबाई फुले, भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने लड़कियों के लिए स्कूल खोले और नारी शिक्षा तथा समानता की मिसाल पेश की। सावित्रीबाई फुले जयंती पर स्कूल, कॉलेज भाषण प्रतियोगिता के लिए शॉर्ट और लॉन्ग स्पीच आइडिया यहां से लें।

सावित्रीबाई फुले की जयंती पर 2 मिनट का छोटा भाषण

आदरणीय प्रधानाचार्यजी, शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों!

आज हम सावित्रीबाई फुले की जयंती पर एकत्र हुए हैं। वे भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं। 1848 में उन्होंने पुणे में लड़कियों का पहला स्कूल खोला। समाज के विरोध और मुश्किलों के बावजूद उन्होंने शिक्षा का दीप जलाया। जैसा कि उन्होंने कहा है, "शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा।" आइए, हम भी संकल्प लें कि शिक्षा से हम समाज बदलेंगे और अपने जीवन को उज्जवल बनाएंगे। सावित्रीबाई फुले अमर रहें!

सावित्रीबाई फुले की जयंती पर 5 मिनट का लंबा भाषण

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों!

आज हम भारत की महान शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती मना रहे हैं। सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के नायगांव में हुआ। केवल 9 साल की उम्र में उनका विवाह हुआ, और उनके पति ज्योतिराव फुले ने उन्हें पढ़ाया और शिक्षिका बनाया।

1848 में उन्होंने पुणे के भिडेवाड़ा में लड़कियों का पहला स्कूल खोला, जहां सभी जातियों की लड़कियों को पढ़ाया गया। रास्ते में उन्हें अपमान, विरोध और गंदगी झेलनी पड़ी, लेकिन वे कभी नहीं हारी। उन्होंने कहा था, "अज्ञान सबसे बड़ा दुश्मन है।" यही सोच उन्हें हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देती रही।

सावित्रीबाई फुले ने न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में काम किया, बल्कि बाल विवाह, सती प्रथा और छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाई। उन्होंने विधवाओं के लिए आश्रय गृह बनाए और नवजात कन्याओं के लिए सुरक्षित घर खोले। 1897 में प्लेग महामारी के दौरान बीमारों की सेवा करते हुए उनका निधन हो गया।

वे कवयित्री भी थीं। उनकी कविता "शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा" आज भी हमें प्रेरित करती है। उनका संदेश स्पष्ट है "अगर लड़कियां पढ़ेंगी, तो देश आगे बढ़ेगा।" आइए, हम सावित्रीबाई फुले की तरह शिक्षा और नारी सशक्तिकरण के लिए खुद को समर्पित करें। उनका सपना पूरा करें और समाज को बेहतर बनाएं।

जय हिंद!