मां के साथ चूड़ियां बेचने वाले रमेश घोलप ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से UPSC पास कर IAS बनने का सपना साकार किया। गरीबी और मुश्किलों से जूझते हुए उन्होंने शिक्षा को अपना हथियार बनाया और कामयाबी की नई इबारत लिखी।

कड़ी मेहनत, संकल्प और हौसले की बदौलत कई लोग सीमित साधनों के बावजूद UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) पास कर IAS अधिकारी बने हैं। आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करते हुए, ये लोग सस्ती किताबों जैसे NCERT, ऑनलाइन सामग्री और सरकारी लाइब्रेरी की मदद से खुद पढ़ाई करके सफलता हासिल करते हैं। ऐसी ही एक कहानी है उस व्यक्ति की, जो कभी अपनी मां के साथ चूड़ियां बेचता था और आज वह UPSC पास कर IAS अधिकारी बन गया। उनका नाम है - रमेश घोलप।

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रमेश अपनी मां का साथ देने के लिए चूड़ियां बेचने लगा

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के महागांव में जन्मे रमेश घोलप के पिता, गोरख घोलप, साइकिल मरम्मत की एक छोटी दुकान चलाते थे। उनकी मामूली कमाई से परिवार का गुजारा होता था, जिसमें रमेश की मां विमल घोलप और उनके भाई भी शामिल थे। लेकिन गोरख की सेहत बिगड़ने और शराब की लत के चलते दुकान बंद करनी पड़ी, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई। तब रमेश की मां विमल ने पास के गांवों में चूड़ियां बेचने का काम शुरू किया। बाईं टांग में पोलियो से पीड़ित होते हुए भी, रमेश अपनी मां का साथ देने के लिए चूड़ियां बेचने लगा।

पड़ोसियों की मदद से वह पिता की अंतिम यात्रा में शामिल हो पाया

रमेश पढ़ाई में बेहद होनहार था और स्कूल का चमकता सितारा भी। लेकिन 2005 में रमेश को अपने पिता के निधन की खबर मिली और आर्थिक तंगी के चलते वह बस का किराया भी नहीं जुटा पाया। पड़ोसियों की मदद से वह पिता की अंतिम यात्रा में शामिल हो पाया। इस घटना ने उसे गहराई से झकझोर दिया और उसे एहसास हुआ कि गरीबी से निकलने का एकमात्र रास्ता शिक्षा है। तब से उसने पढ़ाई में खुद को पूरी तरह झोंक दिया और अपने और अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए संकल्प ले लिया।

ओपन यूनिवर्सिटी से आर्ट्स में डिग्री पूरी की, पहले शिक्षक फिर IAS बने

हालांकि, पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद आर्थिक परेशानियों ने उन्हें एक परमानेंट नौकरी की तलाश में धकेला। उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी से आर्ट्स में डिग्री पूरी की और 2009 में शिक्षक बन गये। लेकिन कॉलेज के दिनों में एक तहसीलदार से हुई मुलाकात ने उसमें नई प्रेरणा जगाई। उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया और UPSC की तैयारी के लिए पुणे चले गये। उसकी मां ने भी पूरा सहयोग दिया और उसकी पढ़ाई के लिए पैसा जुटाने के लिए दिन-रात मेहनत की। आखिर किस्मत ने रमेश के लिए बड़ी सफलता की योजना बना रखी थी। और वे कड़ी मेहनत से UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) पास कर IAS अधिकारी बने।

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