साल 2025 में एजुकेशन सिस्टम में CBSE ने किए 7 बड़े चेंज
CBSE New Rules: साल 2025 में CBSE ने शिक्षा प्रणाली में कई बड़े बदलाव किए, जिसकी खूब चर्चा हुई। एजुकेशन सिस्टम में सीबीएसई की ओर से किए गए ये बदलाव अहम माने जा रहे हैं। जानिए दो बार बोर्ड परीक्षा, 75% अटेंडेंस नियम समेत और क्या-क्या बदला।

साल 2025 में CBSE ने किए बड़े और ऐतिहासिक बदलाव
साल 2025 में CBSE ने स्कूली शिक्षा की दिशा ही बदलने वाले फैसले लिए हैं। ये बदलाव अब तक चली आ रही पढ़ाई की पारंपरिक सोच से बिल्कुल अलग हैं। लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि बच्चों की पढ़ाई समझ पर नहीं, बल्कि याद करने पर टिक गई है। बोर्ड एग्जाम का दबाव, ज्यादा नंबर लाने की होड़ और एक ही परीक्षा से भविष्य तय होने का डर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता रहा है। इसी समस्या को केंद्र में रखकर CBSE ने 2025 में शिक्षा व्यवस्था को नया रूप देने की शुरुआत की है। इन सुधारों का मकसद बच्चों को परीक्षा के तनाव से राहत देना और सीखने को बढ़ावा देना है। जानिए CBSE द्वारा किए गए 7 बड़े बदलाव, जो इस साल सबसे ज्यादा चर्चा में रहे।
75% अटेंडेंस के बिना नहीं दे सकेंगे बोर्ड परीक्षा
CBSE ने 2025 से एक नया नियम लागू किया है कि किसी भी छात्र को बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए उनके स्कूल के पूरे शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसका मतलब यह है कि अगर किसी छात्र की अटेंडेंस निर्धारित सीमा से कम रहती है, तो उसे बोर्ड परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलेगी। इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को सालभर पढ़ाई से जोड़ना है और यह सुनिश्चित करना है कि वे केवल परीक्षा के समय ही सक्रिय न हों। स्कूलों में नियमित अटेंडेंस की मॉनिटरिंग की जाएगी और छात्रों को समय पर जानकारी दी जाएगी कि उनकी उपस्थिति पूरी हो रही है या नहीं।
साल में दो बार 10वीं बोर्ड परीक्षा देने का ऑप्शन
CBSE का सबसे बड़ा फैसला है कि कक्षा 10 के छात्र अब साल में दो बार बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे। यह व्यवस्था एकेडमिक सेशन 2026 से लागू होगी। इसका उद्देश्य है कि बच्चों पर एक ही परीक्षा का दबाव न रहे और अगर पहली बार प्रदर्शन अच्छा नहीं हो पाता है तो उन्हें अपना रिजल्ट सुधारने का दूसरा मौका मिल सके।
बोर्ड एग्जाम पैटर्न में भी बड़ा बदलाव, तर्क के साथ देने होंगे उत्तर
CBSE ने परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव करते हुए कंपीटेंसी आधारित सवालों को प्राथमिकता दी है। अब परीक्षा में यह देखा जाएगा कि छात्र किसी विषय को कितनी गहराई से समझता है और उसे वास्तविक जीवन में कैसे लागू कर सकता है। पिछले समय में छात्रों से केवल परिभाषाओं और रटंत उत्तरों की उम्मीद की जाती थी। अब बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि छात्र सिर्फ याद नहीं, बल्कि समझकर तर्क के साथ जवाब दे। यह बदलाव पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने और बच्चों की सोचने की क्षमता विकसित करने में मदद करेगा।
बेसिक मैथ्स वालों को भी स्टैंडर्ड मैथ्स लेने का मौका
CBSE ने कक्षा 11 में विषय चुनने को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब वे छात्र जिन्होंने कक्षा 10 में बेसिक मैथमैटिक्स ली थी, वे भी कक्षा 11 में स्टैंडर्ड मैथमैटिक्स पढ़ने का ऑप्शन चुन सकते हैं। इससे छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई आसान होगी और उनके करियर से जुड़े विकल्प बढ़ेंगे।
एग्जाम्स में MCQ, केस स्टडी और कंप्रीहेंशन आधारित सवाल बढ़ाए गए
सीबीएसई के नए परीक्षा पैटर्न में बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), केस स्टडी आधारित सवाल और कंप्रीहेंशन आधारित प्रश्न शामिल किए गए हैं। इसका मकसद यह है कि छात्र सिर्फ लिखने तक सीमित न रहें, बल्कि विषय की गहन समझ और व्यावहारिक ज्ञान प्रदर्शित करें। उदाहरण के लिए, एक सवाल अब यह पूछ सकता है कि किसी फिजिक्स या केमिस्ट्री कॉन्सेप्ट को असली जीवन की समस्या में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे परीक्षा अधिक समझ और विश्लेषण पर आधारित होगी।
CBSE के हर छात्र के लिए APAAR ID जरूरी
CBSE से जुड़े हर स्कूल के छात्रों के लिए अब APAAR ID बनवाना जरूरी होगा। APAAR (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) एक तरह की डिजिटल शैक्षणिक पहचान होगी, जिसमें छात्र से जुड़ी पूरी पढ़ाई का डिटेल सुरक्षित रहेगा। स्कूल की जानकारी से लेकर कक्षा, परीक्षाएं और शैक्षणिक उपलब्धियां तक, सब कुछ एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगा।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की CBSE की पहल
CBSE ने मानसिक स्वास्थ्य को भी अपनी प्राथमिकता में रखा है। बोर्ड ने गाइडलाइंस जारी की हैं ताकि बच्चों पर पढ़ाई और परीक्षा का दबाव कम हो, और वे मानसिक रूप से स्वस्थ रहें। स्कूलों में काउंसलिंग, स्टडी प्लान और स्ट्रेस मैनेजमेंट प्रोग्राम शामिल किए जा रहे हैं।
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