हमारे देश में सरकारी सेवाओं में सिविल सर्विस की नौकरियां सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इनमें भी आईएएस और आईपीएस का रुतबा कुछ खास ही होता है। 

करियर डेस्क(तस्वीर प्रतीकात्मक है): हमारे देश में सरकारी सेवाओं में सिविल सर्विस की नौकरियां सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इनमें भी आईएएस और आईपीएस का रुतबा कुछ खास ही होता है। सिविल सर्विस में नौकरी हासिल करने के लिए यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) द्वारा आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा पास करनी पड़ती है। यह परीक्षा बहुत ही कठिन मानी जाती है। इस परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को उनकी रैंकिंग के आधार पर आईएएस या आईपीएस की पोस्ट मिलती है। इसके अलावा, भारतीय विदेश सेवा और दूसरी कई सेवाओं के लिए भी अधिकारियों का चयन इसी परीक्षा के जरिए होता है।

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जानें आईएएस और आईपीएस के अधिकार और दायित्व
आईएएस अधिकारी सिविल एडमिनिस्ट्रेशन का काम संभालते हैं। नियुक्ति के तुरंत बाद उन्हें सब-डिविजन के स्तर पर उन्हें सबसे बड़ा अधिकारी बनाया जाता है। इसके बाद उन्हें जिला अधिकारी का पद दिया जाता है। जिला अधिकारी को कलेक्टर और कुछ राज्यों में उपायुक्त भी कहते हैं। जिले का सामान्य प्रशासन संभालने के साथ ही इन्हें नीति-निर्माण और उसे लागू कराने का काम भी करना होता है। वहीं, आईपीएस की नियुक्ति शुरुआत में एएसपी और फिर एसपी के पद पर होती है। इन्हें पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी संभालनी होती है। लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखने की जिम्मेदारी इनकी ही होती है। वरिष्ठता के आधार पर इन्हें राज्य और केंद्र के प्रशासन में अहम पद दिए जाते हैं।

क्या होती है इनकी सैलरी
बता दें कि आईएएस और आईपीएस का चुनाव यूपीएससी की परीक्षा के माध्यम से ही होता है, लेकिन एक आईएएस अधिकारी की सैलरी आईपीएस अधिकारी की सैलरी से ज्यादा होती है। आईएएस अधिकारी की सैलरी 56,100 रुपए से लेकर ढाई लाख रुपए के बीच होती है, वहीं आईपीएस अधिकारी की सैलरी 56,100 रुपए से लेकर सवा दो लाख रुपए प्रति माह तक होती है। यूपीएससी की परीक्षा में उच्च रैंक लाने वाले कैंडिडेट्स का चुनाव आईएएस के लिए होता है, उसके बाद आईपीएस के लिए चयन किया जाता है।