एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बेहतर करियर के लिए ₹25 लाख की नौकरी छोड़ विदेश से मास्टर्स किया। अब वह महीनों से बेरोजगार है और नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा है। उसकी कहानी ने विदेशी डिग्री के फायदे पर एक नई बहस छेड़ दी है।

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने जब अपनी कहानी ऑनलाइन शेयर की, तो हजारों लोग उससे जुड़ गए। इस इंजीनियर ने भारत में 25 लाख रुपये सालाना की नौकरी सिर्फ इसलिए छोड़ दी ताकि वो विदेश से मास्टर्स की डिग्री ले सके। उसे लगा था कि इससे करियर में चार चांद लग जाएंगे, लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। अब कई महीनों से वो बेरोजगार है और नौकरी की तलाश में भटक रहा है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

Reddit पर शेयर की गई एक पोस्ट में इस इंजीनियर ने अपनी पूरी कहानी बताई। उसने लिखा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी ढूंढना कितना मुश्किल हो गया है और इस वजह से उसे इमोशनल और फाइनेंशियल दोनों तरह की परेशानियां हो रही हैं। अपने फैसले पर अफसोस जताते हुए उसने लिखा, "मैंने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली।"

यहां देखें वायरल पोस्ट 

पोस्ट के मुताबिक, इंजीनियर को यकीन था कि विदेश से मास्टर्स की डिग्री लेने से उसका करियर और कमाई दोनों बेहतर हो जाएंगे। लेकिन कोर्स पूरा करने के बाद, ढेरों जॉब एप्लीकेशन भेजने के बावजूद उसे कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही है। यूजर ने बताया कि असल में जॉब मार्केट की हालत उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब है, खासकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में मुकाबला बहुत तगड़ा है। उसे लगा था कि कंपनियां उसकी विदेशी डिग्री को तवज्जो देंगी, लेकिन उसे लगातार रिजेक्शन ही मिल रहे हैं। Reddit पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई। कई लोगों ने इस पर अपनी राय दी, जिनमें से कुछ ने खुद भी ऐसी ही मुश्किलों का सामना किया था।

एक यूजर ने लिखा, "उस वक्त तुम्हारे पास जो जानकारी थी, तुमने उसके हिसाब से सबसे अच्छा फैसला लिया। किसी को अंदाजा नहीं था कि मार्केट इतना खराब हो जाएगा।" एक और यूजर ने सलाह दी, “आज की स्थिति की तुलना उस सैलरी से मत करो जो तुमने छोड़ी थी। अभी जो तुम्हारे हाथ में है, उस पर ध्यान दो और अप्लाई करते रहो।” एक तीसरे यूजर ने एक बड़ी बात कही, "अब मास्टर्स की डिग्री अच्छी नौकरी की गारंटी नहीं रही। स्किल्स, नेटवर्किंग और सही समय, ये तीनों चीजें भी उतनी ही जरूरी हैं।"

कई लोगों ने यह भी बताया कि पिछले कुछ सालों में दुनियाभर में हायरिंग, खासकर टेक सेक्टर में, काफी धीमी हो गई है। इस वजह से अनुभवी प्रोफेशनल्स को भी नई नौकरी मिलने में दिक्कत आ रही है। कई यूजर्स ने इंजीनियर को हिम्मत बंधाते हुए कहा कि वो नेटवर्किंग करता रहे, अपनी पसंदीदा जगहों के अलावा भी नौकरी ढूंढे और बाजार के सुधरने तक धैर्य रखे।

इस पूरी बातचीत ने एक पुरानी बहस को फिर से हवा दे दी है कि क्या विदेश में जाकर पढ़ाई करना अब भी उतना फायदेमंद है जितना पहले हुआ करता था? कई लोगों का मानना है कि लंबी अवधि में विदेशी डिग्री का फायदा मिलता है, लेकिन कुछ लोगों ने चेतावनी भी दी कि यह मानकर न चलें कि इससे तुरंत मोटी सैलरी वाली नौकरी मिल जाएगी।

हालांकि इंजीनियर ने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ने पर पछतावा जताया, लेकिन कई कमेंट करने वालों ने उसे हिम्मत दी और कहा कि इसे अपनी नाकामी न समझे। उन्होंने तर्क दिया कि करियर का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता और आज के मुश्किल जॉब मार्केट के लिए सिर्फ व्यक्तिगत फैसले ही नहीं, बल्कि आर्थिक हालात भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं।