पाकिस्तान के बन्नू में अफगान सीमा के पास भीड़भाड़ वाले बाजार में रहस्यमयी बम धमाके ने सनसनी फैला दी। 7 की मौत, दर्जनों घायल, पुलिस भी निशाने पर। लगातार बढ़ते आतंकवादी हमलों और पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव ने सुरक्षा पर सवाल खड़े किए। क्या यह सीमा पार साजिश है या बड़े युद्ध की आहट?
Pakistan Bannu Blast: पाकिस्तान का उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का इलाका एक बार फिर दहल उठा है। मंगलवार को बन्नू जिले के सराय नौरंग बाजार में हुए एक भीषण बम धमाके ने 7 जिंदगियों को लील लिया, जिनमें 2 पुलिस अधिकारी भी शामिल थे, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि आसपास की दुकानों की खिड़कियां टूट गईं और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ ही सेकंड में पूरा बाजार धुएं और चीख-पुकार से भर गया। इस हमले ने न केवल दर्जनों परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि इस्लामाबाद और काबुल के बीच पहले से ही सुलग रही तनाव की आग में घी डालने का काम किया है।


बाज़ार में बिछी लाशें: जब चंद सेकंड में मातम में बदली चहल-पहल
सराय नौरंग का व्यस्त बाजार रोज की तरह अपनी रफ़्तार में था, तभी एक जोरदार धमाके ने पूरी तहसील को हिला कर रख दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास की दुकानें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और एक गाड़ी पूरी तरह लोहे के मलबे में तब्दील हो गई। बचाव अधिकारियों ने मलबे से सात शव निकाले हैं, जबकि 37 से अधिक घायल अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हैं। मेडिकल सुपरिटेंडेंट मोहम्मद इशाक के अनुसार, कई घायलों की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है, जिससे मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।

'ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक़': पाकिस्तान की अफगानिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक?
यह धमाका महज एक आतंकी घटना नहीं है, बल्कि एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का हिस्सा प्रतीत होता है। हाल ही में पाकिस्तान ने अफगान धरती पर सक्रिय आतंकियों के खिलाफ 'ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक़' शुरू किया है। दावों के मुताबिक, पाकिस्तानी वायुसेना ने तालिबान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है ताकि सीमा पार से होने वाले हमलों को रोका जा सके। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी धरती पर होने वाले लहू-लुहान हमलों की साजिश अफगानिस्तान की पनाहगाहों में रची जा रही है।

सीमा के करीब बढ़ता तनाव-क्या फिर सक्रिय हुए आतंकी नेटवर्क?
यह इलाका अफ़ग़ानिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित है, जहां पिछले कुछ महीनों से सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हाल ही में हुए सैन्य तनाव और सीमा पार हमलों के बाद यह विस्फोट सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, यह हमला किसी संगठित आतंकी साजिश का हिस्सा हो सकता है, हालांकि अभी किसी समूह ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

तालिबान की गर्जना: "संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं"
दूसरी ओर, काबुल में बैठी तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के इन हवाई हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान अफगान संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है और इन हमलों में निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि वे अपनी धरती की रक्षा करेंगे। तालिबान ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान के अंदरूनी आतंकवाद के लिए अफगानिस्तान को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता। दोनों देशों के बीच यह आरोप-प्रत्यारोप अब सैन्य झड़पों में तब्दील हो चुका है।

क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा: क्या समझौता होगा या युद्ध?
पिछले चार दिनों में यह दूसरा बड़ा हमला है। इससे पहले शनिवार को एक पुलिस चौकी पर हुए हमले में 15 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता यह सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को अस्थिर कर रहा है। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत का कोई नया रास्ता नहीं खुला, तो यह सीमावर्ती संघर्ष एक पूर्ण विकसित युद्ध का रूप ले सकता है, जिसके परिणाम स्वरूप मानवीय संकट और क्षेत्रीय तबाही निश्चित है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संघर्ष को रोकने के लिए हस्तक्षेप करेगा या यह 'आग' पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगी।


